Thursday, 12 September 2013

सच्चाई मुज़फरनगर के दंगो की !!!!!!!!!!!!!

दंगे होना असल में देश के लिए सबसे बड़ी असफलता की निशानी है। पहले सोचा की क्या लिखा जाये इन दंगो पर जब मन पहेले से ही देश की अर्थव्यवस्था के लिए ख़राब है। देश अभी बाहरी ही पीडाओ से व्यथित था अब अंदरूनी जखम हरे कर दिए गए है .

मुजफरनगर दंगे वास्तव में जैसा की मीडिया में पहले तो देर रिपोर्ट हुई फिर इसे बेवकूफाना रिपोर्टिंग के शिकार बनाया गया। मुझे जैसे की पहले से जानकारी है की मीडिया में एक दो को छोड़ कर बाकी सब कार्टून लोग भरे पड़े है जिनके चैनल का पत्रकार मर गया वो भी इस मुजफरनगर नहीं मुज्जफरपुर बता रहे थे। खैर जब देश पर ही कटपुतली और जोकर राज जमाये बैठे है तो इस पत्रकारों से तो शिकायत ही कुछ नहीं।

मुद्दा यह है की बहुत से लोग मुजफरनगर दंगो को बीजेपी की या संघ की करतूत बताते फिर रहे है अपनी अपनी सुविधा के हिसाब से। मैं जो वास्तव में सेकुलर दलों की निकृष्ट राजनीती को चिमटे से भी छूना पसंद नहीं करता उनका भी तात्कालिक दोष नहीं देना चाहता। असल में यह दंगे किसी भी पक्ष की रणनीति का परिणाम नहीं है वो चाहे मुस्लिम एक समाज के रूप में  भी क्यूँ न हो। यह जो हुआ वो वास्तव में एक हकीकत है जो की आज हर उस गाव, कसबे, जिले की इस देश में है जहाँ पर हिन्दू मुस्लिम एक अच्छी खासी मात्र में रहेते है। इसको न तो नेता रोक सकते , न प्रशासन, न ही पुलिस और न ही सेना। क्यूंकि खेल खेल में देश का  माहौल इतना ज्यादा विषाक्त कर दिया गया है जहा पर इनका महत्व ही ख़तम हो गया है। 
आप सेना और पुलिस से क्षणिक शांति तो करवा सकते है परन्तु कहाँ कहाँ और कितनी देर शांति होगी यह कहा नहीं जा सकता। 

देश में पिछले कुछ दशको से हिन्दुओ को जिस प्रकार से दुत्कारा गया है, एक घृणा का पात्र बनाया गया है यह उसकी एक खनक मात्र है। जैसा की पहले भी होता आया है जो आग लगाता है उसी को उस का शिकार भी बनना पड़ता है यह कोई आज की बात नहीं अनंत काल से यह ही होता आया है।

विशेष रूप से तथकथित बड़े राजीनीतिक दलों से कहेना चाहूँगा की जिस प्रकार हर दंगो के लिए संघ और बीजेपी को दोषी ठहराने के परम्परा चली है उस से प्रशासन ने अपनी काम करने आदत छोड़ दी। अब हालात यह है की पुलिस नामक तंत्र तो ख़तम हो चूका और सेना जिस पर की पाकिस्तान और चीन जिससे देश को बचाना है को देश की गालिओ में तैनात कर जा रहा है।  पता नहीं फिर नक्सलियो के खिलाफ सेना को उतारने में क्या दिक्कत है और कौन इसका विरोध  करते है।  

देश में दंगे पहेले बड़े शहरो में होते थे फिर ८ ० के दशक में छोटे शहरो में होने लगे परन्तु अब मुजफरनगर का दंगा गावो से शुरू हुआ है और पुलिस, नेता और सेना के बसकी नहीं इसको जल्द थामना। 

नेताओ के खेल खेल में जिसमे केंद्र की सरकार के सरताज मनमोहन सिंह के मुसलमानों के बारे में सिरे से परे के निम्न स्तर के बयान, कांग्रेस के महसचिव के कोढ़ में खाज पैदा करती टिप्पणिया जो टीवीट की माध्यम से अखबारों की सुर्खिया बनती है और बाकी के मुस्लिम वोटो के आशिको के भाषणों ने देश में अन्दर तक मक्कारी और जहर का बीज बो दिया।

मुजफरनगर के यह दंगे असल में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बहुत ही संवेदनशील मुद्दे के समय पर न्याय न मिलने के कारन ही है। न तो कोई हिन्दू मुद्दा है, न ही राम का मंदिर है और न ही किसी धर्म संसद की उतेजना है। मुद्दा है की हिन्दू अपनी बेहेन बेटी किसी नेता के कहेने या संविधान  में सेकुलर शब्द को घुसाने से मुसलमानों को नहीं दे सकता। आम हिन्दू वेदों में मलेछो के व्यक्तित्व से परिचित है और इसको किसी कांग्रेस के बाप की सरकार या किसी धर्मनिरपेक्षता की टोपी बदल नहीं सकती। हिन्दू बंट  सकता है कट सकता है पर बेहेन बेटी के मुस्लिम हाथो में देने का समझोता नहीं कर सकता। यह न तो मुंबई है न विदेश है और न ही "अमन की आशा "में पागल लोग यह पश्चिम उतर प्रदेश है । यह देश के सबसे संपन्न किसान काश्तकार का प्रदेश है । 

इस की शरुवात कुछ एसे हुई की एक मुस्लिम ने हिन्दू भाइओ की बेहेन के साथ बतमीजी की। जब की कुछ लोगो के बयानों को गौर से समझे तो यह बतमीजी से ऊपर का मामला था। भाइओ ने वो ही किया जो हर भाई करता है, उस मुस्लिम युवक से जा कर बात की जिस दौरान हाथापाई से एक व्यक्ति जान गवां बैठा जो एक एक क्षणिक आवेश में हादसा मात्र था। अब इतने पर कार्यवाही हो  जाती तो बात ख़त्म। परन्तु मुस्लिम तुष्टिकरण के हवाई जहाज पर सवार मुस्लिम, देश और प्रदेश में अपने लोगो की सरकार, मीडिया का हौंसला, संख्या का रौब, प्रशासन का साथ, हतियारो की खेप और गलोबल ताकत  ने कवाल गाँव के मुस्लिमो में एसा जोश भरा की इन दो बच्चो सचिन और गौरव को तालिबानी तरीको से सरे आम २ ० ० से ५ ० ० लोगो ने लातो, घूंसों, मुक्को से पीट पीट कर मौत के घाट उतार दिया। यह है इस दंगो की चिंगारी है जबकि पहेले हिन्दू बेहेन के साथ बलात्कार (जैसा की लोगो में जानकारी है ) की कोशिश हो चुकी । लोगो के पहले गुस्से के कारन है की जिस तरीके से इन दो युवको को मरा  गया है  वह लोगो को उत्तेजित कर गया, पश्चिम उतर प्रदेश समझने वाले जानते है की बात बात पर गोली चल जाती है, लोगो का तो यहाँ तक भी कहना है गोली भी इनको मार दी जाती तो शायद इतना बवाल न होता जितना इनकी अपने ही गाव के २००-४०० लोगो के एक साथ मिल कर मारने से हुआ है. क्या एक भी मुसलमान इतने बड़े गावं में इस हत्या का विरोध करने वाला न था। 

 बेचारे पीड़ित हिन्दू यहाँ पर भी रुक जाते परन्तु प्रशासन का जब दमनचक्र चला, जैसे सचिन और गौरव जिन तो युवको की मुस्लिमो ने हत्या की के ही घरवालो के खिलाफ पुलिस कार्यवाही, हिन्दुओ के पंचायत न करने देने की पुलिस के दमनात्मक कार्यवाही और पुलिस उपायुक्त जो की मुस्लिम ही था की हिन्दुओ के प्रति एक तरफ़ा कार्यवाही ने लोगो के अन्दर अपमान और गुस्से का एक मिश्रण सा घोल दिया। अभी तक इसमें न तो बीजेपी, सपा और न ही कोई और संघटन जुड़ा था। यह सब स्वाभाविक ही चल रहा था। इस बीच एक राजनेतिक खेल जरुर खेला गया की भारतीय किसान यूनियन जो के किसानो की बड़ी जोरदार आवाज हुआ करती थी एक समय में उसके नौजवान नेता पंचायत का नेत्रित्व करने और सपा के कहेने में न करने का जो फैसला किया उस से हिन्दू लोगो को इकठ्ठा होने के कारन मिल गया। अन्यथा मामला एक जाट और मुस्लिम के बीच ही ख़तम हो गया होता। और पोलिस इस पर कार्यवाही करती और गिरफ़्तारी करती। जब हिन्दुओ ने देखा की सचिन और गौरव को श्रदांजलि देने और हिन्दुओ को इकठ्ठा होने में भी प्रशासन सारा सर मुस्लिम समाज के साथ खड़ा है और पुलिस के लोग मुस्लिम से ही ज्ञापन भी ले रहे है और हिन्दुओ पर जो की पीड़ित है पर कार्यवाही कर रहे है तो फिर ग्रामीण लोगो ने फैसला लिया की एक जगह साथ मिलकर बात करेंगे जिसको की पंचायत का रूप दिया गया। अब जैसा की होता है बेचारे ग्रामीण अपनी ट्रेक्टर ट्रोली जो की एक मात्र साधन होता है पर एक साथ खड़े होने चल दिए। दंगा किसको कहेते है इस बात पर गौर करे की जिस जिस जगह से यह ग्रामीण निकले इनके ऊपर जैसा की प्रत्यदर्शियो ने बताया की अत्याधुनिक हतियारो से इनके ऊपर गोलिया चलाई गई जैसे ऐ के ४ ७ और अन्य शास्त्रों से। हिन्दुओ को एक तरफ मुस्लिमो ने घेर कर मारा और दूसरी तरफ से पुलिस ने कोई कार्यवाही मुस्लिम दंगाइयों के खिलाफ नहीं करी। इस के परिणाम यह हुए की जिले  में अफवाहों का बाजार गर्म हुआ और आननफानन में दो तरफ़ा कार्यवाही शुरू हो गई।

बात गौर करने की यह है की दंगे शहरो में नहीं गावो में शुरू हुए और पुलिस तो पुलिस सेना के लिए भी इनको तुरंत रोकना संभव नहीं है। 

भारत की सरकार प्रशासनिक रूप से गावो में दंगे रोकने के लिए तैयार नहीं परन्तु इनके नेता मोबिल , टीवी के माध्यम से अपने घटिया बयानों, भाव भंगिमाओ, तुष्टिकरण से आग लगा चुके है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश जो दिल्ली के लिए बहुत अहम् और गंभीर स्थल है में इस तरह का दंगा बहुत खतरनाक है। जिन लोगो ने मुस्लिम लोगो को भोला, मासूम, निरही माना वो पश्चिमी उतर प्रदेश आये और देखे की किस खूंखार तरीके से हिन्दुओ का नरसंहार किया जा रहा है। 

मुसलमानों में भी किसी रणनीति या संघटन की शक्ति नहीं इन दंगो के पीछे यदि ताकत है तो ऊँचे मनोबल, सत्ता में रसूख, प्रशासन की अकर्मण्यता पर भरोसा, लोकल मुस्लिम उद्योगपतियो का पैसा और गैर क़ानूनी अत्याधुनिक हतियारो का जमवाड़ा। जो सरकारे और पार्टी मुस्लिम आरक्षण और इनके उत्थान के बात कर रही है देख तो लो असल में किसके उत्थान और प्रस्थान की जरुरत है। 

निरही हिन्दुओ को भूखे भाडियो के सामने छोड़ने का खामियाजा तो भुगतना ही पड़ेगा परन्तु दंगे धीमी आंच के है और लम्बे समय तक देश के मन को देहला सकते है। 

सारा न्याय और धन एक तरफ परन्तु कोई नेता / पार्टी / सरकार हिन्दुओ से यह भी उमीद कर रही है की वो अपनी बहु बेटी भी धर्मनिरपेक्षता या मुस्लिम तुस्टीकरण के नाम पर लुटा देंगे तो वो अपनी हस्ती को मिटाने की और अग्रसर है। 

शायद बहुत कम लोगो को पता है के मुजफ्फरनगर का दंगाग्रस्त इलाका १ ८ ५ ७ की क्रांति का इलाका है जो पहले मेरठ जिले में ही होता था। और इसी खून ने लोगो में एक अजीब  जोश भर रखा है जैसे की पुरे हिंदुस्तान की दमनकारी निति इन्ही के ऊपर लागु हो रही हो।          

कांग्रेस / मीडिया / सेकुलर पार्टी / सरकार का पिछले १ ० साल से हिन्दुओ के अन्दर अपमान और घृणा का भाव और मुसलमानों में जोश और ताकत का अहसास ही इन दंगो की रीड है। इतिहास लिखने वाले भी हम पर हंसेगे की इस दौर में ऐसे भी सरकारे / पार्टी / नेता हुए है जो २ ० % लोगो को ८ ० % के खिलाफ हर दम प्रेरित करते है न की यह कहे सके की पाकिस्तान और बांग्लादेश ले चुके हो छोटे भाई की तरह रहो। 

देश में ऐसे नेताओ को जो कहे की हम तो बड़े मजे से गाये का मांस खाते है हिंदुस्तान में हमें तो मजा आता है, २ ५ करोड़ मुसलमान १ ० ० करोड़ हिन्दू को एक घंटे में ख़त्म कर देगा पुलिस तो हटा कर देखो, भारत माता को डायन कहेने वाला प्रदेश का रहनुमा बन जायेगा। उसके रहमो कर्म पर हिन्दुओ के फैसले होंगे। देश के संसाधन पर पहला हक़ उनको देने वाला प्रधानमंत्री होगा जिनको के पाकिस्तान और बांग्लादेश के रूप में अपना हक़ ले चुके है। प्रदेश का मुखिया सिर्फ और सिर्फ मुस्लिम लडकियो को वजीफे बांटेगा और हिन्दुओ को छोड़ देगा। तुष्टिकरण की पपरकाष्ठा।  

देश में और प्रदेश में अंधेर नगरी और चौपट राजा, टेक सेर भाजी टेक सेर खाजा। वहां दंगे नहीं होंगे तो क्या होगा। आग लगाने वाले तो बहुत है पर देखना मित्रो यह है की देश बचाने के लिए पानी कहाँ है ??? 

इन दंगो में असाम या मुंबई देखने से कुछ नहीं होगा और न ही सऊदी अरब और तालिबान देखने से, न ही इंडियन मुजाहिदीन और सिमी देखने से कुछ मिलेगा। आजाद हिंदुस्तान का यह वो दंगा है जो सालो से एक कौम के अन्दर जोधा अकबर, हिमायुं का मकबरा, शाहजहा का ताज महेल जैसे ख्याल गढ़े गए, फ़िल्मी लव जिहाद बनाया गया, ७ ८ ६ को रुतबा दिया गया, जब हिंदुस्तान को ही शहंशाह अकबर का दरबार बना दिया तो फिर हिन्दू की बेहेन बेटी को इज्जत कौन देगा और जब नहीं देगा तो मुजफरनगर ही होगा। 

और यह धधक एक जगह की नहीं उन लाखो कस्बो और गावों की है जहाँ पर हिन्दू को जलील अपमानित और उसके ही देश में उसको आतंकवादी बताया जा रहा है और दुसरो के पापा को आसाराम धारवाहिक में दबाया जा रहा है।

कहेने वालो को भी नहीं पता की देश की सुरक्षा एजेंसिओ पर ऊँगली उठाने वाले सेकुलर नेता / पार्टी / सरकार ने देश का कितना नुक्सान किया है, लोग कुंठित है एक कांग्रेस के महासचिव के बाटला हॉउस की थ्योरी से, गुजरात १३ साल से उबाऊ मीडिया कहानी से , आई बी और रा को क्षणिक लाभ के लिए उनको लांछित करने के लिए। जब लोकतंत्र में जनता ही शासक है तो शोषित बी वो क्यूँ ?    

मुस्लिम तुष्टिकरण के होते इन से हिन्दुओ को बचाने के लिए संसद में विधयक बनाने चाहिए न की मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए नए कानून।  copy by त्यागी जी ब्लोग 

Tuesday, 23 July 2013

क्या हम भारत के लोग उस मेडक जैसे हो गए है पढ़े इस bolg को

एक वैज्ञानिक ने मेडक पर शोध किया पहले एक मेडक को गरम पानी एक दम से डाला मेडक एक दम से छलांग लगा के पानी से बहार आ गया फिर एक बर्तन में ठन्डे पानी में मेडक के डाला फिर धीरे धीरे पानी को गरम करने लगा 24 घंटे तक मेडक ने कोई हलचल नहीं की तापमान को एडजेस्ट करता रहा और फिर जयादा गरम पानी हुआ तो मेडक मर गया हमारे देश में भी भ्रष्टाचार धीरे धीरे बढ रहा है एक दिन हमारा  देश मर जायेगा अगर एक दम से देश में  भ्रष्टाचार हुआ होता तो हम भी मेडक की तरह छलांग लगा कर बच जाते पर धीरे धीरे हमने एडजेस्ट कर लिया है आज हमें आदत हो गई है भ्रष्टाचार आतंकवाद सेकुलारिजम भ्रष्ट नेताओ की कभी हमने इमानदार नेता देखे ही नहीं एक नरेन्द्र मोदी जो इमानदार है उसके साथ भी हम खड़े नहीं हो पा रहे है यह देश के लिए बहुत खतरनाक है हमारी आने वाले हमारे ही पुश्ते हम पर थुकेगी जेसे हमें कहते हम पहले गुलामी इस हुए की हमारे पूर्वज कायर थे क्या हमारे बच्चे हमें कायर डरपोक कहे फैसला हम सब को करना है मैंने कर लिया है मैं मोदी के साथ हु क्या आप हो 

Monday, 22 July 2013

इस्लाम और जापान के बारे मे क्या यह सच है ?

इस्लाम और जापान के बारे मे क्या यह सच है ?
क्या आपने कभी यह समाचार पढ़ा कि किसी मुस्लिम राष्ट्र का कोई प्रधानमंत्री या बड़ा नेता तोकियो की यात्रा पर गया हो?
क्या आपने कभी किसी अखबार में यह भी पढ़ा कि ईरान अथवा सऊदी अरब के राजा ने जापान की यात्रा की हो?
कारण·
जापान में अब किसी भी मुसलमान को स्थायी रूप से रहने की इजाजत नहीं दी जाती है।·
जापान में इस्लाम के प्रचार-प्रसार पर कड़ा प्रतिबंध है।·
जापान के विश्वविद्यालयों में अरबी या अन्य इस्लामी राष्ट्रों की भाषाएं नहीं पढ़ायी जातीं।·
जापान में अरबी भाषा में प्रकाशित कुरान आयात नहीं की जा सकती है।
इस्लाम से दूरी·
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जापान में केवल दो लाख मुसलमान हैं। और ये भी वही हैं जिन्हें जापान सरकार ने नागरिकता प्रदान की है।·
सभी मुस्लिम नागरिक जापानी बोलते हैं और जापानी भाषा में ही अपने सभी मजहबी व्यवहार करते हैं।·
जापान विश्व का ऐसा देश है जहां मुस्लिम देशों के दूतावास न के बराबर हैं।·
जापानी इस्लाम के प्रति कोई रुचि नहीं रखते हैं।·
आज वहां जितने भी मुसलमान हैं वे ज्यादातर विदेशी कम्पनियों के कर्मचारी ही हैं।·
परन्तु आज कोई बाहरी कम्पनी अपने यहां से मुसलमान डाक्टर, इंजीनियर या प्रबंधक आदि को वहां भेजती है तो जापान सरकार उन्हें जापान में प्रवेश की अनुमति नहीं देती है।
अधिकतर जापानी कम्पनियों ने अपने नियमों में यह स्पष्ट लिख दिया है कि कोई भी मुसलमान उनके यहां नौकरी के लिए आवेदन न करे।·
जापान सरकार यह मानती है कि मुसलमान कट्टरवाद के पर्याय हैं इसलिए आज के इस वैश्विक दौर में भी वे अपने पुराने नियम नहीं बदलना चाहते हैं।·
जापान में किराए पर किसी मुस्लिम को घर मिलेगा, इसकी तो कल्पना भी नहीं की जा सकती है।
यदि किसी जापानी को उसके पड़ोस के मकान में अमुक मुस्लिम के किराये पर रहने की खबर मिले तो सारा मोहल्ला सतर्क हो जाता है।·
जापान में कोई इस्लामी या अरबी मदरसा नहीं खोल सकता है।
मतांतरण पर रोक·
जापान में मतान्तरण पर सख्त पाबंदी है।·
किसी जापानी ने अपना पंथ किसी कारणवश बदल लिया है तो उसे और साथ ही मतान्तरण कराने वाले को सख्त सजा दी जाती है।·
यदि किसी विदेशी ने यह हरकत की होती है उसे सरकार कुछ ही घंटों में जापान छोड़कर चले जाने का सख्त आदेश देती है।·
यहां तक कि जिन ईसाई मिशनरियों का हर जगह असर है, वे जापान में दिखाई नहीं देतीं।
वेटिकन के पोप को दो बातों का बड़ा अफसोस होता है। एक तो यह कि वे 20वीं शताब्दी समाप्त होने के बावजूद भारत को यूनान की तरह ईसाई देश नहीं बना सके। दूसरा यह कि जापान में ईसाइयों की संख्या में वृध्दि नहीं हो सकी।
·जापानी चंद सिक्कों के लालच में अपने पंथ का सौदा नहीं करते। बड़ी से बड़ी सुविधा का लालच दिया जाए तब भी वे अपने पंथ के साथ धोखा नहीं करते हैं।·
जापान में 'पर्सनल ला' जैसा कोई शगूफा नहीं है। यदि कोई जापानी महिला किसी मुस्लिम से विवाह कर लेती है तो उसका सामाजिक बहिष्कार कर दिया जाता है। जापानियों को इसकी तनिक भी चिंता नहीं है कि कोई उनके बारे में क्या सोचता है। तोकियो विश्वविद्यालय के विदेशी अध्ययन विभाग के अध्यक्ष कोमिको यागी के अनुसार, इस्लाम के प्रति जापान में हमेशा यही मान्यता रही है कि वह एक संकीर्ण सोच का मजहब है। उसमें समन्वय की गुंजाइश नहीं है।
स्वतंत्र पत्रकार मोहम्मद जुबेर ने 9/11 की घटना के पश्चात अनेक देशों की यात्रा की थी। वह जापान भी गए, लेकिन वहां जाकर उन्होंने देखा कि जापानियों को इस बात पर पूरा भरोसा है कि कोई आतंकवादी उनके यहां पर भी नहीं मार सकता।

Friday, 19 July 2013

इस देश के हिन्दू खो चूके है अपना अष्टसिद्धि : : : : : तभी इस देश की हालत आज ये हो गई है :::::

१. जिस हिंदू की भुजाओं की जगह आँख फड़कनी शुरू हो गयी हो,,,,,,

२. जो हिंदू 'तलवार' उठाने की जगह 'सलवार' पहनने को तैयार है,,,,,

३. जिस हिंदू ने राम के नाम के साथ श्री लगाने मे डरते हुए खुद के आगे श्रीमती लगा लिया हो,,,,,,

४. जो हिंदू लज़्ज़ा की जगह सज़्ज़ा मे व्यस्त हो,,,,,,,

५. जिस हिंदू को वीर की जगह फकीर (मुल्लासाँई) पूजने की आदत पड़ गयी हो,,,,,,

६. जिस हिंदू को "जाग" मे भी "भाग" सुनाई देता हो,,,,,,

७. जो हिंदू "रक्त" के डर से मुल्ला "भक्त" बन गये हैं,,,,,,

८. जिन की ज़ुबान से बस ये निकलता है की वो क्या कर सकते हैं क्यों की सरकार के पास पुलिस है, सेना है,,,,,,

मेरा उनसे बस एक ही सवाल है की क्या वो ये किन्नर सरकार त्रिलोक विजेता लंकापति रावण से भी ज़यादा बलशाली है और क्या तुम सिर्फ़ उस वृद्ध जटायु से भी ज़यादा गये गुज़रे हो...अरे याद करो अंधो बचपन से देखा होगा की एक बूढ़ा जटायु सिर्फ़ अपनी चोंच के बल पर लड़ गया था महाबलशाली रावण से और बस अपनी चोंच से उस पापी को घायल कर के प्रभु श्री राम को रास्ता दिखा गये थे रावण के विनाश के लिए....यही वजह है की वो प्रभु के हाथो से सीधा मोक्ष पा कर अमर हो गया और तुम जीते जी ही मर चुके हो,,,, शायद इसीलिए प्रभु श्री राम ने गिद्धो को उपर बुला लिया क्यों की उनको भी हमारी नपुंसकता पर रोना आता रहा होगा,,,,

अरे अगर मन मे संघर्ष की भावना हो और प्रभु पर विश्वाश हो तो एक बूढ़ी चोंच ही काफ़ी है मोक्ष पाने और पापियों के विनाश के लिए वरना जल्द ही समय आ रहा है रावण के दरबार की नर्तकी बन कर मुज़रा गाने का,,,,

हे जटायु मुझे नही नाचना है रावण के दरबार मे, मुझे भी मोक्ष चाहिए बिल्कुल आप जैसा,,,,,,, किन्नरो फिर से बोलो की तुम्हारे पास क्या है...??? सरकार से लड़ने के लिए...?????? शर्म आती है हमें की एक गिद्ध थूक कर चला गया हम१०० करोड़ पर,,,,,,,

जागौ हिन्दूऔं,,,,,,,,, जागौ,,,,,,,,

Wednesday, 17 July 2013

हिन्दू अपने को हिन्दू नही Indian कहो सेक्युलरवाद है भाई

एक मोदी ने अपने को हिन्दू क्या बोल
दिया लगता है देश में भूचाल आ गया , इस देश के
हिन्दुओं की दयनीय स्थिति देखिए कि एक प्रदेश
का मुख्यमंत्री भी अब अपने को हिन्दू नहीं बोल
सकता | अब हालत यह हो गई है की देश में नवाज
शरीफ की जीत पर केरल में
पाकिस्तानी झंडा फहराया जा सकता है , इमाम
भुखारी अपने को ISI का एजेंट बोल सकता है , जम्मू
कश्मीर का मुख्यमंत्री अपने को मुस्लिम बोल
सकता है , आधे घंटे में 85 करोड़ हिन्दुओं को मिटाने
की बात हो सकती है किन्तु देश में एक प्रदेश
का मुख्यमंत्री तक अपने को हिन्दू नहीं बोल
सकता |कहीं यदि एक आम हिन्दू भी जोर से
चिल्ला कर अपने को हिन्दू बोल दे तो न जाने ये
सेकुलर उसे कहाँ ले जाकर मारेंगे | बहुत सो लिए अब
जाग जाओ |
तेरह करोड़ इक्यासी लाख अठासी हजार दो सौ चालीस
"13,81,88,240" मतलब 13.4% कुल इतने मुसलमान हैं भारत में और
१. कांग्रेस
२. बसपा
३. सपा
४. तृणमूल
५. टीएमसी
६. टीडीपी
७. जेडीयू
८. जेडीएस
९. राजद
१०. लोजपा
११. पीस पार्टी
१२. द्रमुक
१३. एनसीपी
१४. झामुमो
१५. सीपीएम
१६. बीजेडी
१७. सीपीएम
१८. सीपीआई
१९. एमआईएम
२०. नेशनल कांफ्रेंस
और भी कई छोटी बड़ी पार्टियाँ दिन रात इन मुसलमानों का वोट लेने के लिए बयासी करोड़ से ज्यादा (827,578,868) हिन्दुओं का अपमान पे अपमान किये जा रही हैं, 

क्या हिन्दुओं की वोट की कोई कीमत नहीं है?
सभी हिन्दुओं को कहो कि इन सब पार्टियों के खिलाफ़ वोट देकर सबक सिखा दो..!
ये लोग भविष्य में हिन्दुओं का अपमान करने की जुर्रत ना कर पाये,,

"वन्देमातरम"

Thursday, 11 July 2013

पिछले दस साल में सारे देश को जोकर बना दिया !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

बड़ी दुर्गति है मित्रो -
  • भारत देश की अर्थव्यवस्था भयंकर तरीके से गिर रही है !!!!!!!!!!!!
  • देश के पास कुल ७ महीने के आयत के लिए विदेशी मुद्रा है !!!!!!!!!!
  • भारतीय रुपया ६ २ पार कर गया एक डॉलर के मुकाबले !!!!!!!!!!!!
  • विकास दर ३% के नीचे जा रही है !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
  • देश पर एक कमजोर प्रधान मंत्री का राज है !!!!!!!!!!!!!!!!!!!
  • देश पर धर्म और वर्ग के आधार पर बाँटने वाली कांग्रेस पार्टी का विदेशी नेत्रित्व है !!!!!
  • आई एस आई और इंडियन मुजाहिद्दीन का विस्तृत नेटवर्क है भारत में !!!!!!!!
  • दिग्विजय सिंह देश के बाँटने वाले मुहजोर नेता सत्ता के फलक पर सिरमौर है !!!!!!
  • दुनिया के किसी देश के निवेशक की नजर में भारत आकर्षक नहीं रहा !!!!!!!!!!!!
  • ३ ० ० जिले नक्सलवादियो और मओवादियो के विस्तार से प्रभावित है !!!!!!!!!!!!!
  • देश की खुफिया एजेंसी अपने रिपोर्टिंग ऑफिस पी एम् ओ से आतंकित है !!!!!!!
  • सरकारी संस्थाओ के भूलुंठित आत्मबल करने  वाले कांग्रेसी सरकारी कौशिश !!!!!!!!!!!
  • देश की सरकारी संस्थाओ को आपस में लड़ाने का पाप करती कांग्रेस !!!!!!!
  • सेना उतराखंड में कांग्रेसी सरकार के पाप धो रही है !!!!!!!!!!!!!!!
  • चीन ने चारो और से देश को घेर लिया है !!!!!!!!!!!!!!!!!!!
  • भारत में बम विस्फोट से आम जनता को डराया जा रहा है !!!!!!!!!!!!!
  • बिहार विस्फोट से देशद्रोहियो के हौंसले बुलंद है !!!!!!!!!!!!!!!
  • सेकुलर नेता देश में अतंकवादियो के रक्षक बनकर उनको बेटे और बेटिया बनाने पर तुले है !!!!!!!!!!!!
  • महंगाई बढ़ रही है जिस से देश के आम जन का मनोबल गिर हुआ है !!!!!!!
  • बेरोजगार कर भिखारी बना कर, लेपटोप और मोबाइल बाँटने के वादों से देशवासियो का आत्मसम्मान रसातल में है !!!!!!!!!!!!
  • श्री लंका, पाकिस्तान देश भारत के खिलाफ है, नेपाल , बांग्लादेश सहयोग करने की दशा में नहीं है !!!!!!!
  • भरष्टाचार से देश हलकान है !!!!!!!!!
  • कुंठित मतदाता जो अरबो के घोटालो के बात भी कांग्रेस को सत्ता का ताज दे रहा है !!!!!!!!!!!!!!!
  • बाद और अपदाओ से घिरा भारत !!!!!!!!!!!!!
  • चिंतित, पीड़ित और कर्जदार, आत्महत्या करने वाला  किसान !!!!!!!!!!!!
  • टेक्स के भयंकर बोझ से पीड़ित शहरी वर्ग !!!!!!!!!!!!!!!
  • साइकल की औकात नहीं और हवाई जहाज में घूमते नेताओ से !!!
  • रोज - रोज हमारी पेंट उतारता चीन और सरदार मनमोहन सिंह और चीन की मेजबानी का लुफ्त उठाने वाली कांग्रेस की रानी सोनिया गाँधी और युवराज राहुल गाँधी की चुप्पी । !!!!!!!!!!!!!!
  • टुटा मानस , बंटे लोग, टीवी का बंधा समाज, क्रिकेट के सट्टे के पैसे पर बिका माध्यम वर्ग, पलायन करता शिक्षित समाज, बिके  हुए नेता , पेट फुलातेूू नौकरशाह, भ्रमित पुलिस, कैमरों के आगे अपनी बेटियो की उम्र वालियो के साथ नंगे होते नेता। 

क्या हो एसे में देश का दुश्मन भारत पर आक्रमण कर दे ?????????????????

२ ० ० ४ में हम कहाँ थे और आज कहाँ है !!!!!!!!!

बोलीवुड स्टार श्री राज कपूर की वो चंद पंक्तिया याद आगाई

 "जाने कहाँ गए वो दिन "

पिछले दस साल में सारे देश को जोकर बना दिया , भारतवर्ष देश का हाल लल्लू यादव के राज में बिहार से भी बुरा हो गया। 
Note copy by त्यागी जी कै ब्लोग से ताकि जनता । जागे जागो भारत वरना जागने का मोका हि नही मिलेगा 

Saturday, 6 July 2013

मुझे नरेन्द्र मोदी पर गर्व है जीतना शिवाजी राणा सांगा महाराणा पर है क्या आपको है

निश्चित रूप से नरेंद्र भाई मोदी जो वर्तमान में गुजरात के मुख्मंत्री है वो एक जिन्दा मिसाल है "हिंदुत्व के प्रहरियो" के लिए, एक शख्स जो अकेला ही अपने दम पर हिंदुत्व के विरोधियो के सामने न केवल डटा रहा बल्कि मुहं तोड़ जवाब भी देता है. यह एक शख्स जिसने भारतीय इतिहास के अब तक के सबसे बड़ी दुरभिसंधि हिंदुत्व के दुश्मनों कांग्रेस और वामपंथियो के सत्ता में रहेते विरोध की परकाष्ठा देखी और सहन की है. उसका एक वीर की भांति मुकाबला भी किया है. यह मुकाबला किसी भी तरह छत्रपति शिवाजी और राणा सांगा से कम न था और आज भी यह हिन्दू वीर अपनी उर्जा, शक्ति, ओज से भारत और हिन्दू विरोधी शक्तिओ के सामने एक चट्टान की भांति खड़ा है. जिसको हर भारतीय और हिन्दू को गर्व हो सकता है. श्री नरेंद्र भाई मोदी हमेशा भारतीय राजनीति में एक ध्रुव तारे की तरह रहेंगे और आने वाली नस्लों के लिए प्रेरणा के स्रोत होंगे.

Friday, 5 July 2013

विकास की बाते भी तभी तक लोग सुनेंगे तब तक उसके पीछे हिंदुत्व का सिधांत है

कुछ लोगो को बुरा जरुर लगेगा परन्तु इस देश ने अटल बिहारी वाजपाई नामक मोडल को पूरी तरह नकार दिया था। जो लोग यह सोचते है की खाली विकास चुनाव में जीत की गारेंटी है तो वो चन्द्र बाबु नायडू और अटल बिहारी के शासन का हाल देख लो. और जो लोग मोदी के टोपी न पहन ने को मुद्दा बना रहे है वो भी जान ले की मोदी जी को पता है की विकास की बाते भी तभी तक लोग सुनेंगे तब तक उसके पीछे हिंदुत्व का सिधांत है. ६ साल से कोमुनिस्ट भारतीय उप महाद्वीप में भटक रहे है पर मिला क्या? कारन है देश की आत्मा से कटना। जो मुर्खता केजरीवाल और अन्ना जी भी कर चुके है. अरे यार आप तो बिलकुल हिंदुत्व के प्रतिकूल कार्य कर रहे हो. यदि हिंदुस्तान में लोग विकास के मुद्दे पर ही जीतते तो हिन्दुओ के मंदिर तिरुपति, वैष्णो देवी पद्मनाभन की तरह धनी न होते. एक सीमा के बाद लोग विकास को पूछते ही नहीं है. अरे नितीश बाबु हिंदुत्व न सही कम से कम "मासलो नीड थेओरी" ही पढ़ लो. 

Thursday, 4 July 2013

क्या बस इतना की मै एक हिंदू हूँ ?

एक सुन्दर संवाद (ज़रूर पढ़े )

बी एस सी का छात्र का कॉलेज का पहला दिन (गले में बड़े बड़े रुद्राक्ष की माला)

प्रोफेसर ::बड़े पंडित दिखाई देते हो लेकिन कॉलेज में पढाई लिखाई पर ध्यान दो ,,,
पूजा पाठ घर में ही ठीक है !!

(क्लास के सभी बच्चे ठहाका लगाते है )

छात्र::(विनम्रता से) :- सर आप मेरे गुरु है और सम्माननीय भी इसलिए आपकी आज्ञा से ही कुछ कहना चाहूँगा,

शिक्षक कहते है :-बोलो

छात्र ::सर जब ऐसे छोटे कॉलेज छोडिये आई आई टी और मेडिकल कॉलेज तक में एक मुस्लिम छात्र दाढ़िया बढाकर या टोपी चढाकर जाते है और कितनी भी बड़ी लेक्चर हो क्लास छोड़कर नवाज़ के लिए बाहर निकल जाते है तो शिक्षक को वो धर्मनिष्ठता लगता है,
जब क्रिस्चन छात्र गले में बड़े क्रौस लटकाकर घूमते है तो वो धर्मनिष्ठता है और ये उनके मजहब की बात हुई,
और आज आपके सामने इसी क्लास में कितने ही लड़कियों ने बुर्खा पहना है और कितने ही बच्चो ने जालिटोपी चढा रखा है तो आपने उन्हें कुछ नहीं कहा ,

तो आखिर मेरी गलती क्या है ?

क्या बस इतना की मै एक हिंदू हूँ ?

शिक्षक क्लास छोड़कर बाहर चला गया और बच्चे को कॉलेज ने १५ दिनों के लिये सस्पेंड कर दिया गया !

सच वो जो कांग्रेस बोले बाकी सब "फेंकू, साम्प्रदायिक, तानाशाह और जाहिल"

उतराखंड की त्रासदी में क्या कुछ अजीब आपको नहीं दीखता है। वैसे कहेने वाले तो इसे कांग्रेस माया का एक मायाजाल बता रहे है। 
कांग्रेस का षड्यंत्रों का इतिहास है। और कमाल यह है की भारत के लोग इन षड्यंत्रों का समझते हुए भी समझना नहीं चाहते। वैसे इसके कारण है!!!  एसा क्यूँ है पर मानने वाले तो मान लेंगे और जो नहीं माने वो भी मुंडी हिलाकर चलते बनते है। असल में २ ० ०  साल अंग्रेजो के राज के पीछे भी तो कोई कारण होंगे? चलो गुलाम हुए तो हुए पर कोई भी देश गुलामी के बाद भी गुलाम हो एसा किसी देश के इतिहास में नहीं सिवाए भारत के। पर क्यों ? कारन है"इंडिया इज आइडिया". देश के अधिकारी वर्ग हो, बड़े नेता हो , इतिहासकार हो ,  शिक्षाविद हो किसी से भी पूछ लो वो भी भारत को एक आइडिया ही  कहेंगे। विशेषकर "श्री राम चन्द्र गुहा" जी से पूछ लो तो वो इस पर एक लम्बा लेक्चर दे देंगे।  अच्छा यह भारत माता - वाता इन लोगो के लिए कोई मायने नहीं रखती। यह तो बस हम जैसे बुद्धू , अपढ़ और जाहिल भारतियो के "सेंटीमेंट" के कद्र भर है। अब केजरीवाल को ही देखलो भारत माता का अन्ना हजारे के मंच से फोटो ही हटा दिया जब कांग्रेसी और वामपथियो ने आपत्ति की। 

एक चाय वाले ने कांग्रेस, वामपंथियो, माओ वादियो, सेकुलर लोगो के पेट में हलकान भर रखा है। और इस चाय वाले का नाम "श्री नरेन्द्र भाई मोदी" है। क्या कभी आपने सुना है  की विभिन्न राज्यों की मुख्मंत्री किसी दुसरे राज्ये में जाकर त्रासदी पर लोगो को सीधे बचा रहे है? नहीं !! पर उतरांचल में हुआ है विभिन्न राज्यों के मुख्मंत्री लाइन लगा  लोगो को बचा रहे है . क्या श्री नरेन्द्र भाई मोदी को इसका क्रडिट नहीं देंगे ? अरे कांग्रेसी तो छोड़ो तेलगु देशम जैसे दल जो मुस्लिम  वोट के घोषित भीखमंगे है वो भी हिन्दू तीर्थ स्थल पर सहयता करने के लिए लड़ रहे है. वाह नरेंदर भाई आपका भी कमाल है . जैसा सोचा उस से ज्यादा नपुंसक है यह सेकुलर भाडू। पर अच्छा है आपकी नक़ल ही सही पर देश का कुछ तो भला हो रहा है। 

कई विचार है श्री केदारनाथ के ऊपर प्राकर्तिक आपदा के। कुछ लोग   "धरा देवी " की मूर्ति हटाने के बताते है, कुछ गाँधी सरोवर को तोड़ने का कारण  बता रहे है ,  कुछ बादल फटना बता रहे है, कुछ चीन की कलाकारी बता रहे है तो कुछ कांग्रेस का षड्यंत्र बता रहे है . मोटे तौर पर लोग मानते नहीं की कोई दल इतना भी गिर सकता है खैर मानने वाले तो यह भी मानते है की जो लोग अपने आराध्यो भगवान् शिव , राम और कृष्ण की दुर्दशा पर हँसते है और अपने माँ बाप को वृद आश्रम छोड़ देते है वो वोट के लिए क्या श्री केदार नाथ और बद्री नाथ को छोड़ सकते है। जो दिल्ली से ५ ० ०  किलोमीटर के दायरे में हिन्दू भगवान् का अस्तित्व नहीं मानते उनको १ ० ० ०  किलोमीटर दूर बिहिड़ो में भगवान् से मतलब क्या ? कमाल है दिल्ली में श्री राम भक्तो पर लाठिया चलवाते हो और श्री केदार नाथ के तीर्थ के लिए "विज्ञापन सहयेता ". 

दाल में काला नहीं ? 

श्री केदारनाथ का  निर्माण तो श्री राम जन्मभूमि क्यूँ नहीं, कृष्ण जन्मभूमि का क्यूँ नहीं? बाबा विश्वनाथ का क्यूँ नहीं ? जब अंग्रेज गए तो "कनाट प्लेस " राजीव गाँधी चौक " तो बाबरी ढांचा - श्री राम जन्मभूमि क्यूँ नहीं ? क्यूंकि यह "इंडिया इज आइडिया" में नहीं आता। हा हा हा हा मित्रो आप भारत में नहीं रहेते एक "आइडिये" में रहेते है और उसका नाम इंडिया है जो कांग्रेस जनित है। क्या मजाक है ५ ० ० ० वर्ष की सभ्यता के साथ। और यह ही अंतर है एक चाय वाले की सोच में और त्याग के ठेकेदार गाँधी परिवार में। गाँधी परिवार को यह पता चल जाये की भारत की सत्ता किसी राष्टवादी हिन्दू के हाथ आने वाली है तो वो हर संभव कोशिश करेगे की इस "इंडिया इस आइडिया " को कोई और ले न ले। अरे साक्षात् देश पर आपातकाल लगाने वाली कांग्रेस तो लोकतान्त्रिक है और ३ बार मुख्मंत्री बनकर राज्ये को विकसित करने वाला तानाशाह। वहा मैं वारी जायुं , बलिहारी जाऊं इन तर्कों पर।

देश की गद्दारों की संताने "चाय वाले " को फेंकू बता रही है। "भारत निर्माण " के फर्जी कार्यक्रम बनाने वाले फ़िल्मी लोग देश के स्वेम्भु शिक्षाविद बने घूम रहे है . 

श्री केदार नाथ की त्रासदी की टाइमिंग पर क्या कोई शक नहीं है। कोयला घोटाला से ध्यान हटाने के लिए यह सब तो बाये हाथ का खेल है . अब स्वयं प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कटघरे में हो तो कुछ एक भारतीयों की मौते इनके लिए क्या मायने रखती है। क्यूंकि इतिहास गवाह है की  इंद्रा गाँधी अपनी जिद्द के लिए पुरे भारत को आपातकाल में बंधक बना सकती है। नेहरु भारत माता के दो टुकड़े कर सकता है , गाँधी (जो राष्ट्र पिता नहीं उसे कांग्रेस विज्ञापन के माध्यम से ५ ० ० ० वर्ष की सभ्यता का बाप बना रखा है ) अपने स्वार्थ के चलते पटेल जैसे नेता को प्रधानमंत्री नहीं बनने देता। सुभाष चन्द्र बोस को कांग्रेस से धक्के मार कर बहार कर सकते है व्यक्तिगत हितो के लिए। पांच हजार सिखों को दिल्ली की सडको पर जला सकते है। गरीबी हटाने के नाम पर सत्तर करोड़ लोगो को भिखारी बना सकते है. बीस लाख लोगो का बंटवारे के समय कत्ल होने देती है, लाखो के सुहाग उजाड़ सकती है। करोडो को बेघर कर सकती है,    अमरीका और चीन को दिया कमिटमेंट की भारत को फिर से        १ ९  ९ ०  के दशक में लेकर आयेंगे और ग्रोथ रेट ३% पर ला दी। तो क्या कुछ एक षड्यंत्र नहीं रच सकती। 

भारत की जनता कांग्रेस के लिए एक "इंडिया आयडिया" से आगे कुछ भी नहीं है और इस एक आइडिये के लिए करोडो के खून से भी कांग्रेस नाहा सकती है . क्यूंकि यह उसकी जिद्द है की भारत उसने बनाया है और कोई नरेन्द्र मोदी इस देश को उस से छीन नहीं सकता . बस जैसे इंद्रा गाँधी की जिद्द थी की भारत उसके बाप का है और यह ही जिद्द सोनिया गाँधी की है की कोई कितना भी बड़ा मानसिक रोगी हो पर भारत का शासक कोई चाय बनाने वाला नहीं बन सकता "एक मानसिक रोगी " ही "कांग्रेस मेड भारत" का नायक होगा। 

इस जिद्द को पूरा करने में एक नहीं कितने हिन्दू तीरथ स्थल तबाह हो या कितने लोग मरे इस से गाँधी परिवार और कांग्रेस को कुछ लेना देना नहीं . भारत जैसे सोने की चिड़िया किसी कीमत पर भी भारत के अपने लोगो के पास नहीं जाने चाहिए फिर चाहए एक और आपातकाल ही भले क्यूँ न लगा दिया जाये। 

और जो लोग आने वाले २ ० १ ४ के चुनाव को नेताओ की जंग मान रहे हो वो सावधान हो जाये यह कोई नौटंकी नहीं बल्कि हिंदुस्तान की तक़दीर का फैसला होने जा रहा है की भारत                         "नपुन्सको मान सिंह, जाफर " का राष्ट्र है या राणा संगा, प्रताप और  वीर सावरकार का है . 

पेट्रोल ७५ रूपये, ग्रोथ रेट ३%, अगले सात महीने के आयात का मात्र विदेशी मुद्रा, ७ ०  पर रुपया, चार सिलेंडर पर टिका हिन्दू सयुंक्त परिवार का भारत , कोयले की कालक से काला भारत, एक त्याग की देवी के झूटे फरेब से भूलुन्टित भारत, मानसिक रोगी को देश का शासक बनाने की जिद्द, कांग्रेसी गेंग की जकडन में देश की सरकार और उसका शासन, माया मुलायम की नौटकी की दिल्ली,  केदार नाथ को मरघट बनाने वाले कांग्रेसी सरकार, उतराखंड की बर्बादी के चाटुकार नेताओ का भारत राष्ट्र है या उन करोडो लोगो के शाहदत का भारत जो भारत को "मानव सभ्यता का पालना " कहेते है और इसको भारत माता कहेते है। फैसला आपका है क्यूंकि राजनीति के चिम्पू तो अपने स्वार्थ के लिए "गुजरती भारतीयों" की सहयता को भी लौटा रहे है अब चाहए वो मगध के पेट के मरोड़ से पैदा सच्चा सेकुलर मुख्यमंत्री हो या फिर गाँधी परिवार का चाटुकार मुख्यमंत्री हो। हर हाल में देश कांग्रेस के कब्जे में रहेना चाहिए तो लोकतंत्र अन्यथा देश का नेता हिटलर और मुसोलिनी।
टोपी पहना कर और पहन कर देश को लूटो तो लोक्तान्रिक तरीके, टोपी न पेहेन कर  दोहरा चरित्र नहीं अपनाओ तो "साम्प्रदायिक " 

सच वो जो कांग्रेस बोले बाकी सब "फेंकू, साम्प्रदायिक, तानाशाह और जाहिल" क्या कहेंगे कांग्रेस के इस प्रचार को आप। 

क्या श्री दिग्विजेय सिंह, मनीष तिवारी, कपिल सिब्बल, जनार्दन दिवेदी, शकील अहेमद को देखते हुए हिटलर के प्रचार तंत्र के मुखिया गोबल्स की याद नहीं आती।

और कांग्रेस कहेती है बेचारे मुख्तार अब्बास नकवी, शाहनवाज हुसैन, सिद्धार्थ सिंह, प्रकाश जावडेकर, सोनकर शास्त्री तथाकथित तानाशाओ के "गोब्ल्स". अँधा भी बता देगा की लोकतंत्र की आड़ में किसके पास कितने बड़े हिटलर के गोब्ल्स है और जो लोग एक वोट से लोकसभा में सत्ता गवाना गए, जोड़ तोड़ न करवा पाने की वजह से झारखण्ड में सत्ता से बहार हो गए। भ्रष्टाचार के झूटे आरोपी यदुरप्पा को भी न बचा पाए और कर्नाटक का दुर्ग गवां दिया। एक झंडू की बाम से पूरा बिहार गवां दिया, अपने समर्थन से मायावती को मुख्यमंत्री बनवा कर अपना उत्तर प्रदेश गवां दिया, देवेगौडा के बेटे को मुख्मंत्री बनवा कर अपनी सरकार गिरवा ली। बाबरी ढांचा "शिव सेना " ने गिराया और पांच राज्यों में सरकार भाजपा ने बर्खास्त करवा ली . वो तो हिटलर के गोब्ल्स है। 
परन्तु देश पर आपत्काल लगा कर भी , देश की राजधानी दिल्ली में सिखों के नरसंहार करके भी, अपने धुर विरोधियो                        (माया, मुलायम , वाम दल ) के साथ केंद्र में सत्ता चलकर नैतिकता को समुन्द्र में फेंककर भी, गाँधी परिवार की तानाशाही और चाटुकारिता के बाद भी, अपने बूढ़े और निसहाये अध्यक्षों (नरसिम्हा राव और सीता राम केसरी ) को धक्के देने के बाद भी, मुम्बई को शंघाई बनाने, १ ० ० दिन में महंगाई समाप्त करने,  देश से काला धन वापस लाने के झूटे वादों, गरीबी हटाओ के नौटंकी नारे के बाद भी , बीस लाख किसानो की हत्या करने के पाप के बाद भी, हजारो दंगो को कराने के बाद भी, जगदीश टाइटलर, सज्जन कुमार को बेशर्मी से बचने के बाद भी, नविन जिंदाल जैसे मीडिया की हत्या करने वाले घोटाले बाज के, रॉबर्ट वढेरा के पापो के बाद भी, पकिस्तान बनवाने के बाद भी, सेज के माध्यम से किसानो को घरो से दरबदर करने के बाद भी,  घोटालो की लाइन लगाने वाली कांग्रेस सरकार के बाद भी, कोत्रोची को भगाने के बाद भी, सीबीआई को तोता बनाने के बाद भी, राष्ट्र के जासूसी ढांचे को ध्वस्त कर सैनिको और पुलिस को अतंकवादियो और देशद्रोहियो के सामने असाह्ये बनाने के बाद भी, देश के नेताओ (श्यामा प्रसाद मुखर्जी, दीन दयाल उपाध्याय, सुभाष चन्द्र बोस, लाल बहादुर शास्त्री, की षड्यंत्रिक हत्या के बाद भी कांग्रेस भोली, स्वच्छ, पवित्र, त्याग की मूर्ति, लोकतान्त्रिक मूल्यों को मानने वाली, गरीबो की हितेषी, किसानो की पोषक और आम आदमी की पार्टी है। 
वाह मित्रो इससे बड़ा "झूट " क्या हो सकता है परन्तु फिर भी और आज भी इस झूट का "निर्माण " जारी है। 

कोई शक ?????????????????????Post a Comment

Saturday, 13 April 2013

पैकेजिंग का समय सारे नेता पैकेजिंग में व्यस्त है जनता कहा है पता नहीं

मोदीजी ने सही कहा -ये पैकेजिंग का ज़माना है अब वह समय नहीं जब जोर अच्छा  माल बनाने पर होता था अब तो माल की पैकेजिंग भी जोरदार होनी चाहिए !पिछले दिनों हमें अपने एक मित्र को जन्म दिन का उपाहार देना था हमने डेढ़ सौ रूपए की एक सुन्दर  तस्वीर खरीदी  उपाहार विक्रेता ने खुबसूरत पैकेजिंग की पैकेजिंग का पचास रुपया अलग से दिया हमें पता था पैकेजिंग मटेरियल का हश्र कचरेदान  है लेकिन ज़माने की हवा देख कर हम चुप रहे अब राजनीतिक दल भी पैकेजिंग का महत्त्व समझ गए है भारतीय जनता पार्टी ने जब से राम नाम जपना छोड़ा है तब से सत्ता के बहार पड़े हाय हाय कर रहे है इस बार इन्होने ने जोरदार रणनीति बनाई है इनके अध्यक्ष गंगा नहा कर गौ और राम की बाते कर रहे है और विकास परुष मोदीजी श्रीराम कालेज से पैकेजिंग का नारा उछाल  रहे है
मामला जनता को लुभा सकता है इधर कांग्रेस भी अपनी रीपैकेजिंग में लगी हुई है राहुल ब्रांड के सहारे तीसरी बार कुर्सी पाना साहते है कांग्रेस को लगता है यह देश उनके बिना नहीं चल सकता और कांग्रेस गाँधी ब्रांड के बिना बिकुल बेकार है नितीश सेकुलारिजम की पैकेजिंग में लगे है इस सारी पैकेजिंग  में जनता कहा है  यह सोचने की बात है लेकिन जनता बदल चुकी है शहरों में अटटालिकाए बन रही है और एक से एक लुभावनी कारे बिक रही है महगाई का स्यापा सिर्फ बेहद गरीब कर रहे है सरकारी नोकरिपेशा तो डीए की नई किस्त  का हिसाब लगाते रहते है मध्यम वर्ग की लड़के लडकिययो  की चिंता देश नहीं जीन्स और आईपीएल है विचार से ज्यादा तलूक बियर से हो रहा है फिल्मी स्टायल में डकैती और अपनी कथित प्रेमिका की तस्वीरे फेसबुक पर अपलोड करने में उसे आनंद आता है कांग्रेसी प्रदेशो का हाल क्या कहे आपसे क्या छिपा है एक ज़माने में विचार तो सवतंत्र थे अब तो विचारो की भी पैकेजिंग हो रही है न्यूज़ के लिए पे करके कुछ भी छपवा सकते हो कोनसा बुद्धिजीवी बाए बोलता बोलता दाए बोलने लग जाये यह कहना बड़ा मुस्किल है तो देश लोगो  तैयार हो जाइये राजनीतिक दल नई नई पैकेजिंग के नारे पेश करने वाले है इन मोर्डन पैकेजिंग पर मत जाना भीतर क्या माल है इसके लिए चोकस रहना वरना पुरे पांच साले पछताना पड़ेगा    जय हिन्द

Sunday, 7 April 2013

गाँधी की भूल कांग्रेश को सत्ता दी भाग 1


गाँधी के साथ अन्याय यह हो गया की गाँधी मूलतः आध्यात्मिक व्यक्ति थे और दुर्भाग्य से सारे जीवन राजनीतिज्ञों से घीरे रहे गाँधी के लिए राजनीति आफत धर्म में थी गाँधी का धर्म तो निति थी राजनीती मज़बूरी थी लेकिन गाँधी के आसपास जो लोग इकट्ठे हुए थे उनके लिए राजनीती मूल थी निति आफत धर्म थी और यही फासला गाँधी और गांधीवादियों के बिच हिन्दुस्थान के लिए आताम्घती सिद्ध हुआ है जैसे ही सत्ता हिन्दुस्थान के हाथ आई राजनीति तो गाँधी की मज़बूरी थी सत्ता हाथ में आते ही वो हट गए और उनके साथी सहयोगी और अनुयायियों के हाथ में सत्ता पहुच गई उनके लिए निति आफत धर्म थी सता हाथ में आते ही उनकी निति छुट गई गाँधी की राजनिति छुट्टी जिसका जो सार भाग था वह शेष रहे गया और जो आसर था वह छुट गया गाँधी ने सोचा होगा की उनके पीछे जो लोग ईकठे है वे धर्म बुध्दी के है वे विचारशील वे नैतिक और सदाचारी सिध्द होंगे गाँधी वहा चुक गए गाँधी वहा ठीक  नहीं समझ पाए गाँधी से भूल हो गई उस भूल के लिए हम अभी भी पछता रहे है और पता नहीं कितने दिन पछताना पड़ेगा गाँधी यह भूल गये जो लोग सत्ता उपलब्ध होने तक उनके अनुयायी थे सता उपलब्ध होते ही गाँधी से उनका कोई संबध नहीं रहा गया है गाँधी की उपियोगिता सिर्फ उन्हें इतनी थी की सत्ता गाँधी के बिना उपलब्ध नहीं हो सकती थी सत्ता उपलब्ध होते ही गाँधी से कोई प्रोयोजन नहीं रहे गया था गाँधी को आखिर आखिर में समझ में आने लगा था और उन्होंने और उन्होंने ने कहा था की अब में खोटा सिक्का हो गया हु अब मेरी कोई चुनता नहीं तभी उन्होंने कहा था इस कांग्रेस को भंग करके देश के गरीबो के हाथ सरकार दे देनी चाइए काश उन्हें यह ख्याल पहले ही आ जाता की जो लोग उनके पीछे है सत्ता मिलते ही उनकी कोई चुनेगा ही नहीं गाँधी अगर जीते तो गाँधी को अपने बुढ़ापे में एक दूसरी लड़ाई सरू करनी होती अपने ही शिष्यों के खिलाफ गाँधी इतने हिमत के आदमी थे के की उस बुढ़ापे में भी लड़ाई शरु करते लेकिन शिष्यों का शोभाग्य है की शिष्यों की दीखता है भीतरी प्रथना गोडसे ने सुन ली गाँधी को समाप्त कर दिया शिष्यों का शोभाग्य समझना चाइऐ की गाँधी बिच से हट गये अन्यथा इस बात की करीब करीब गारंटी  कही जा सकती है की एक लड़ाई गाँधी ने अंग्रेजो के खिलाफ लड़नी पड़ी थी उस से भी खतरनाक लड़ाई और बड़ी कांग्रेस के खिलाफ लड़नी पड़ती लिकिन इतिहास की बड़ी अजीब और अद्भुत घटना है जिनसे उन्हें लड़ना पड़ता वे ही उनके हकदार और मालिक बन गये और कोई रक्षक हो गए वे ही अब गाँधी को बचाने में लगे हुए है गाँधी से उन्हें कोई प्रयोजन नहीं है  गाँधी के नाम पर अपने को बचाने में लगे हुए है श्री मोरारजी जी ने कहा था  की टीकाकार धीरे धीरे समझ लेंगे सत्य क्या है जेसे की मोरारजी और उनके साथियों को सत्य पता है सिर्फ टीकाकारो को समझने की जरुरत है में उनसे कहना चाहता हु की टीकाकारो की तरफ सत्य है इस बार सत्ताधिकारियो के के पास सत्य नहीं है समझना टीकाकारो को नहीं पड़ेगा समझना सत्ताधिकारियो को पड़ेगा और नहीं समझे तो सत्ता खोये बिना और कोई रास्ता नहीं सच तो यह है की सत्य तो यह है की सत्य सायद ही कभी सत्ता के साथ रहा हो सत्य अक्षर सूली पर रहा है देश के सिहासनो पर आज तक असत्य ही बैठ जाता रहा है हमेशा की कथा यह है आज तक हम ऐसा समाज निर्मित नहीं कर पाए जिसमे सत्य को सिहासन मिल सके सत्य सदा सूली पर है और गाँधी की पूरी जिंदगी सूली पर लटके लटके व्यतीत हुई और उनके शिष्य सत्ताधिकारी हो गये गाँधी की आत्मा कही भी होगी पछताते होंगे क्या इसी आज़ादी के लिए मैंने जीवन भर कोशिश की इसी आज़ादी के लिए यह आज़ादी मिली भारत को गाँधी का सपना यह था की आज़ादी मिलेगी भारत को किस भारत को बिरला टाटा अम्बानी दलिमिया को नहीं गरीब भारत को करोडो करोडो लोगो के भारत को
गाँधी भले आदमी थे भले आदमी हमेशा एक भूल करते है वो दूसरों  को भी  भला समझत लेते  है   गाँधी में वह भरपूर भूल की जिन्ना को भी भला समझा वे निर्दोष चित व्यक्ति थे उन्हें सायद आखिर आखिर में अपनी भूल समझ आगई थी लेकिन अपनी भूल सुधारने से पहले भगवान ने उन्हें उठा लिया उनका सपना सबका उदय गरीब भारत का उदय नहीं हो सका और कांग्रेस के जीते जी नहीं होगा कांग्रेस की वजह से आज़ादी मिली सिर्फ अमीरों को पूंजीपतियों को भ्रष्टाचारियो को जिनकी सम्पति आजदी के वक्त 3 करोड़ थी आज उनकी तिन तीन हजार करोड़ हो गयी और गरीब गरीब ही रहा सायद गाँधी को ख्याल आ जाता आज़ादी किसके हाथ गयी गरीब हिन्दुस्थान को असली हिन्दुस्थान को  आज़ादी अभी तक नहीं मिली कुछ भी प्रयोजन नहीं हुआ सिर्फ इतना हुआ की अँगरेज़ पूंजीपति के हाथ से सत्ता हिंदुस्थानी पूंजीपति के हाथ सत्ता का हस्तारण हो गया गाँधी इसके लिए नहीं लड़े थे भला आदमी जो भूल करता है वो उन्होंने भी की उनको भी यह खयाल था की पूंजी का यह राज पंजीपति का यह शोषण समझाने बुजाने से हल हो हो सकती है वोह हल नहीं हुआ और वो हल नहीं होगा और अब लोकतंत्र के नाम पर निरंतर चलाये जाने की कोशिश की जारी ही है हिन्दुस्थान में सही लोकतंत्र निर्मित नहीं हो सकता जब तक आर्थिक समानता की हम कोई वेवस्था आयोजित नहीं कर लेते आथिक रूप से सामान हुए बिना लोकतंत्र एक धोका है एक सारा सर धोका जहा गरीब और अमीर का भारी विभाजन हो जहा संपतिशाली और सम्पति हिनो के बिच करोडो का फासला हो वहा लोकतंत्र सिर्फ नाम का है लोकतंत्र के पीछे धनपति का तंत्र होना सुनिश्चित है हिन्दुस्थान में लोकतंत्र तभी हो सकता है  एक समाजवादी वेवस्था जीवन को स्वीकार करे उसके पहले   हिन्दुस्थान में लोकतंत्र एक आत्मावाचना के आतिरिक और कुछ भी नहीं समानताये आये बिना वास्तिविक स्वतंत्रता और लोकतंत्र निर्मित होते भी नहीं
हिन्दुस्थान को अभी एक सर्वहारा के अधिनायक की तंत्र की जरुरत है जो नरेन्द्र मोदी जैसे लोग ला सकते है
अभी तक भारत में लोकतंत्र है ही नहीं आमिर तंत्र का नाम लोकतंत्र है कितने है आमिर वह जो बड़ा लोग समुदाय है उनका कोनसा लोक तंत्र है उनका तंत्र हो कैसे सकता है लेकिन जब पूंजीपति की वेवस्था और उनके शोषण  हटाने की बात की जाऐ तो सवाल उठता है की लोकतंत्र में दबाव कैसे डाला जा सकता है लोकतंत्र में दबाव डालना तो गलत हो जायेगा लेकिन में यह पूछता हु चोरो पर आप दबाव नहीं डालते की ह्त्या मत करो चोरी मत करो हत्यारे और चोर कल यह नहीं कहेंगे की हमारा लोकतंत्र सीना जा रहा है हमारी व्यक्तिगत स्वतंत्रता छीनी जा रही है हम चोरी करना साहते है हमें चोरी करने दी जाये लेकिन चोरो के लिए तलवार है और शोषक के लिए तलवार नहीं हो सकती शोषक के लिए तलवार की बात उठती है तो अहिंसा और लोकतंत्र बीछ में खड़े हो जाते है और हत्यारे चोर भ्रष्टाचारियो के लिए लोकतंत्र का सवाल नहीं है उनके लिए सत्ता अधिनायकशाही का उपयोग करती है सच तो यह है की अभी तक हमने समझा ही नहीं की कांग्रेस चोर से भी ज्यादा खतरनाक है   
मैंने चुना है चीन में एक अद्भुत विचारक थे लाओत्से वह एक बार एक राज्य के कानून मंत्री हो गये थे ज्यादा दिन नहीं चला वह मन्त्रीपन क्योकि इतने अच्छे विचारक कितने इस तरह का काम कर सकते थे पहले ही दिन उसकी अदालत में एक मुकदमा आया एक आदमी ने एक साहूकार के घर चोरी की थी चोरीं पकड़ी गयी थी उस आदमी ने चोरी स्वीकार भी कर ली थी लाओत्से ने उस चोर को छह महीने की सजा सुनाई और उसके साथ कहा  जिस  साहूकार के घर चोरी हुई है उसको  भी छह महीने की सजा देता हु साहूकार केहने लगा आप पागल हो गये हो यह कभी दुनिया में लिखा है मेरा कसूर क्या है यह कोनसा न्याय है किस किताब में लिखा है लाओत्से ने कहा गाव की सारी सम्पति एक आदमी के पास इकटठी हो जाये जाएगी तो चोरी नहीं होगी तो क्या होगा चोर बाद में चोर है पहले चोर तुम हो जब तक दुनिया में शोषण है तब तक चोरी बंद नहीं होगी साहे कितनी भी जेल भरो सहे कितनी भी नेतिक शिक्षा दो जब तक दुनिया में शोषण की महाचोरी हो रही है तब तक चोरी बंद नहीं होगी अपने आप पैदा होती रहेगी वह बंद नहीं हो सकती लाओत्से को मंत्री पद छोड़ना पड़ा
क्योकि सम्राट ने कहा तुम पागल हो साहुकारो को भी कभी सजा होती है लाओत्से ने कहा था की में घोषणा करता हु जब तक साहुकारो को सजा नहीं होगी तब तक चोरी होती रहेगी जब तक भ्रष्टाचारियो को सजा नहीं होगी भ्रष्टाचार होता रहेगा लोकतंत्र चोर को तो रोकता है शोषक को नहीं रोकता शोषक को रोकने की बात की जाये तो वह केहता है लोकतंत्र पर खतरा है हत्या हो जाएगी लोकतंत्र की ऐसे लोकतंत्र तंत्र की दो कोडी की कीमत नहीं है जिसका कुल मतलब बहुजन का शोषण हो हिन्दुस्थान में लोकतंत्र की जरुरत पड़ेगी हिन्दुस्थान में एक समय  लोकतंत्र आएगा उससे पहले की हिन्दुस्थान लोकतंत्रिक बने लेकिन अभी जब तक हिन्दुस्थान का बड़ा हिस्सा गरीब और शोषित है तब तक एक सख्त अधिनायकशाही की जरुरत है जो हिन्दुस्थान के शोषण तंत्र को तोड़ देने का काम करे उसके बाद ही सही लोकतंत्र स्थापित हो सकता है  अच्छी  अच्छी बातो के पीछे बुरे बुरे इरादे छिपे होते है लोकतंत्र एक अच्छा नारा है लेकिन पीछे पीछे लोकतंत्र के नाम पर पूंजीशाही को बचाने के अतिरिक और कुछ भी  नहीं है हमें ख़याल भी नहीं आता अच्छे सब आड़ बन जाते है और हम जिए चले जाते है  में कांग्रेसियों से कहूँगा की अगर वे प्रशंसा ही किये जा रहे है गांधीवाद की तो ठीक से समझ ले अन्यथा गांधीवाद को अर्थी पर छडा देने की जरुरत है इसका दूसरा भाग बाकि है समय निकल कर जल्द लिखूंगा अंत में में मेरे गरु ओशो को और आपके अन्दर बेठे परमात्मा को परणाम करता हु