Saturday, 13 April 2013

पैकेजिंग का समय सारे नेता पैकेजिंग में व्यस्त है जनता कहा है पता नहीं

मोदीजी ने सही कहा -ये पैकेजिंग का ज़माना है अब वह समय नहीं जब जोर अच्छा  माल बनाने पर होता था अब तो माल की पैकेजिंग भी जोरदार होनी चाहिए !पिछले दिनों हमें अपने एक मित्र को जन्म दिन का उपाहार देना था हमने डेढ़ सौ रूपए की एक सुन्दर  तस्वीर खरीदी  उपाहार विक्रेता ने खुबसूरत पैकेजिंग की पैकेजिंग का पचास रुपया अलग से दिया हमें पता था पैकेजिंग मटेरियल का हश्र कचरेदान  है लेकिन ज़माने की हवा देख कर हम चुप रहे अब राजनीतिक दल भी पैकेजिंग का महत्त्व समझ गए है भारतीय जनता पार्टी ने जब से राम नाम जपना छोड़ा है तब से सत्ता के बहार पड़े हाय हाय कर रहे है इस बार इन्होने ने जोरदार रणनीति बनाई है इनके अध्यक्ष गंगा नहा कर गौ और राम की बाते कर रहे है और विकास परुष मोदीजी श्रीराम कालेज से पैकेजिंग का नारा उछाल  रहे है
मामला जनता को लुभा सकता है इधर कांग्रेस भी अपनी रीपैकेजिंग में लगी हुई है राहुल ब्रांड के सहारे तीसरी बार कुर्सी पाना साहते है कांग्रेस को लगता है यह देश उनके बिना नहीं चल सकता और कांग्रेस गाँधी ब्रांड के बिना बिकुल बेकार है नितीश सेकुलारिजम की पैकेजिंग में लगे है इस सारी पैकेजिंग  में जनता कहा है  यह सोचने की बात है लेकिन जनता बदल चुकी है शहरों में अटटालिकाए बन रही है और एक से एक लुभावनी कारे बिक रही है महगाई का स्यापा सिर्फ बेहद गरीब कर रहे है सरकारी नोकरिपेशा तो डीए की नई किस्त  का हिसाब लगाते रहते है मध्यम वर्ग की लड़के लडकिययो  की चिंता देश नहीं जीन्स और आईपीएल है विचार से ज्यादा तलूक बियर से हो रहा है फिल्मी स्टायल में डकैती और अपनी कथित प्रेमिका की तस्वीरे फेसबुक पर अपलोड करने में उसे आनंद आता है कांग्रेसी प्रदेशो का हाल क्या कहे आपसे क्या छिपा है एक ज़माने में विचार तो सवतंत्र थे अब तो विचारो की भी पैकेजिंग हो रही है न्यूज़ के लिए पे करके कुछ भी छपवा सकते हो कोनसा बुद्धिजीवी बाए बोलता बोलता दाए बोलने लग जाये यह कहना बड़ा मुस्किल है तो देश लोगो  तैयार हो जाइये राजनीतिक दल नई नई पैकेजिंग के नारे पेश करने वाले है इन मोर्डन पैकेजिंग पर मत जाना भीतर क्या माल है इसके लिए चोकस रहना वरना पुरे पांच साले पछताना पड़ेगा    जय हिन्द

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