Saturday, 10 January 2015

धर्मातरण और धर्म स्वतंत्र्य अधिनियम #osho

भारतीय संसद जो न करे थोडा है बुढ़े बच्चों की जमात है शरीर से तो बूढ़े है बुद्धि से बहुत बचकाने जिस विधायक को धर्म स्वातंत्र्य विधेयाक नाम दिया जा रहा वह वस्तुतः धार्मिक परंतत्रता लाने का विधेयक है उसका नाम ही झूठा है नाम उल्टा है


इस विधेयक के द्वरा इस बात की चेष्टा की जा रही की लोग धर्म परिवर्तन न कर सके कोई हिन्दू ईसाई न हो सके कोई मुसलमान न हो सके कोई मुसलमान हिन्दू न हो सके मुसलमान हिन्दू होते भी नहीं ईसाई हिन्दू होते भी नहीं इसलिए विधेयक वस्तुतः ईसाई धर्म के खिलाफ है क्योकि हिन्दू ईसाई होते है


और किसी व्यक्ति की धर्म को चुनने की स्वतंत्रता को छीनने स्वतन्त्रता विधेयक कहना अत्यंत मूढ़तापूर्ण है अगर कोई ईसाई होना चाहता है तो वो हक़दार है ईसाई होने का सच तो यह है जन्म के साथ धर्म का कोई संबंध नहीं है नहीं तो आज नहीं तो कल भारतीय संसद को एक और विधेयक ले आना चाहिए फ्रीडम ऑफ पॉलिटिकल आइडियालजी बिल राजनैतिक विचारधारा का स्वतन्त्रता का विधेयक की जो कम्युनिस्ट के घर पैदा हुआ है वो कम्युनिस्ट ही रहना पड़ेगा और जो कांग्रेसी के घर पैदा होगा वो उसे कांग्रेसी ही रहना पड़ेगा अगर जन्म के साथ राजनीती तय नहीं होती तो जन्म के साथ धर्म की विचारधारा कैसे तय हो सकती है जन्म का क्या सम्बन्ध है विचारधारा से ? किसी आदमी के खून की जाँच से बता सकते हो की वो हिन्दू है या मुसलमान है या ईसाई है ?किसी आदमी की हड्डिया बता सकेगी की उसकी विचारधारा क्या थी - नास्तिक था या आस्तिक ?


धर्म से और जन्म का कोई संबध नहीं है


लेकिन यह देश हिन्दू मतांधो के हाथो में पड़ा जा रहा है इस देश में जो क्रांति हुई उसे क्रांति नहीं कहना चाहिए प्रतिक्रांति हो गई है यह देश हिन्दू मतांध लोगो के हाथ का शिकार हुआ जा रहा है चेष्टा यह है की क़ोई हिन्दू किसी दूसरे धर्म में न जा सके लेकिन कोई नहीं पुछता हिन्दू धर्म के ठेकेदारो से हिन्दू किसी दूसरे धर्म में जाना क्यों चाहते है और अगर जाना चाहते है तो उनके जाने के कारन मिटाओ अगर हिन्दू नहीं चाहते की हिंदु ईसाई न हो तो उनके जाने के कारण मिटाओ एक तरफ हरिजन दलितों को जिन्दा जलाते है उनकी स्त्रियों पर बलात्कार करते हो उनके बच्चों को भून डालते हो गाँव के गाँव बर्बाद कर देते हो आग लगा देते हो और दूसरी तरफ वे ईसाई भी नहीं हो सकते यह तो खूब स्वतंत्रता रही जीस धर्म में उनका जीवन भी संकट मैं


है उस धर्म में ही उन्हें जीना होगा इसको स्वतंत्रता कहते हो


लेकिन इस विधेयक को लाने वाले लोगो का कहना है की ईसाई लोगो को गरीबो और दलितों अदिवाशियो को भरमा लेते है हम भरमा ने के खिलाफ विधेयक बना रहे है


तुम नहीं भरमा पाते और ईसाई भरमा लेते है ?


इस विधेयक को लाने वालो का कहना है की ईसाई लोगो को धन पद नोकरी प्रतिष्टा शिक्षा भोजन अस्तपताल स्कूल ऐसी चीजे देकर भरमा लेते है तो हिन्दू पांच हजार सालो से क्या कर रहे है गरीब दलित आदिवाशीयो के लिए स्कूल नहीं खोल सके एक ढंग का अस्तपताल नहीं बना सके गरीबो को रोजी रोटी कपडा नहीं दे सके अगर ईसाई मशीनरी लोगो को रोजी रोटी कपडा दे कर भरमा रहे है तो यह सिर्फ हिन्दू और समस्त हिन्दू साधू संतो और नेताओ यह सिर्फ तुम्हारी लांछना है यह तो भारत के समस्त हिन्दू पर कलंक है कालिख पूत गई पांच हजार सालो में हम लोगो को रोटी रोजी भी नहीं दे पाये लोग इतने भूखे है इतने दिन इतने दुर्बल की रोटी रोजी के लिए धर्म बदल लेते है तो निशिचत हिन्दू धर्म की कीमत रोजी रोटी से ज्यादा नहीं है और हिन्दू धर्म ने दिया क्या है अगर दिया होता तो क्यों बदलते ? अगर देश के तमाम हिन्दू साहते हो की न बदले तो कुछ दो अस्तपताल खोलो स्कूल खोलो भेजो अपने साधू संतो को उनके दुःख दर्द बाटे हैम हिन्दुओ के पास 50 लाख हिन्दू साधू संत सन्याशी है भेजो इनको सेवा करे उनकी स्कूल चलाये अस्तपताल खोले मगर हिन्दू सन्याशी सेवा लेता करता नहीं उसने तो सदियों से सेवा ली है उनके पैर दबाओ उसके शरणो में सर रखो लोग थक गए है मूढो के शरणो में सर रखते रखते


थोथी बकवास थोथे सिद्धान्त पेट नहीं भरते भूखे भजन होही नहीं गोपाला


मेरे विचारो को मान लेना जरुरी नहीं इस इस पर विचार जरूर करना अगर इसमें कुछ सच्चाई होगी तो वो सच आपका अपना हो जायेगा

SADGURU OSHO KE PARVACHAN 

नसमकार