राजस्थान कै छोटे से गाँव मैं हूँ आज शाम को एसे गाँव कै कूछ लोगों खड़े थै मैं भी उनके पास गया मूझेछे एक ने पूछा ओर क्या हाल चाल भाई साहेब धन्दा पानी कैसा चल रहा हैं मेने कहा बहुत मंदी हैं लोगों कै पैसे कहा देश कै सारे पैसा कांग्रेस ने लूट लिया ईतने घोटाले किए हैं करोड़ लूट लिए नेता ओ ने कितनी मेहगाई हैं उनका दूसरा प्रशन चून कर हमको चक्कर आगया उन्होंने कहा ये घोटाले क्या ओर कैसे होते हैं हमारे पैसे कैसे लूटे मेरे पैसा तो मेरे बैक मैं कोई कैसे लूट सकता हैं आज बैक मैं चैक किये हैं दोस्तों हमारे देश मैं 60% लोग गाँवो मे रेहतै हैं उनमें से 80%लोगों को देश मैं क्या हो रहा हैं मालूम नहीं या मालूम हैं उनको देश से कोई मतलब नहीं ईसलिए कांग्रेसी चोरो को ड़र नहीं ईनका वोट फिक्स हैं हमारे गाँव मैं st sc या पूरे राजस्थान मैं एक ही बात सिखाई जाती
हैं कांग्रेस हमारी पार्टी हैं बस ओर उच्च जाती पूरोहीत राजपूत चोधरी सूथार माली जैन etc…अपनी अपनी जाती मैं ही लड़ रहे हैं राजस्थान मैं इलेक्शन मैं हर जाती से एक एक आदमी इलेक्शन लड़ते हैं वोट जाती वाद पर पड़ते
दूर्भागय यह हैं कोई हिन्दू इलेक्शन मैं खड़ा नहीं होता सब हिन्दू हिन्दू नहीं होते यहीं कांग्रेस का 60सालों से राज करने का रहष्य हैं ओर न जाने कब तक राज करेगी मेरे गाँव मैं ही एकता नहीं हैं दोस्तों मेने कहीं पढ़ा हैं हमारा देश कभी जगतगूरू था क्या हम जगतगूरू ओ कै वंशज हैं एसे होते हैं जगतगूरू कै वंशज शक होता हैं राम राम
Friday, 26 October 2012
आप बिती
Monday, 22 October 2012
कोकरोच और कव्वा' बनाम 'हिन्दू और मुस्लिम'
एक कीट होता है कोकरोच, इनकी ख़ास आदत होती है... जब भी कोई साथी कोकरोच ऊपर चढ़ता है...टांग पकड़ कर खींच लेते हैं... एक कोकरोच मरेगा तो दूसरा देखने भी नही आएगा... संगठन नाम की कोई चीज नही होती...एक पक्षी होता है कव्वा... शक्ल व वाणी का कर्कश, चालाक और ख़ास बात ये कि एक कव्वे की मौत पर अठारह कोस के कव्वे इकट्ठे होकर कांव-कांव मचाते हैं और अपने संगठन की मिसाल बनाते हैं...भारत में कोकरोच हैं हिन्दू... रोज मरते हैं... जुल्म सहते हैं.. अन्याय झेलते हैं मगर संगठित नही होते... उदारता की आड़ में नपुंसकता छुपाते हैं, कटते हैं, मरते हैं मगर उफ़ तक नही करते...जनसंख्या है सौ करोड़, मगर कर्म हैं विलुप्त प्रजाति जैसे...जबकि कव्वे हैं मुसलमान- कट्टर, कर्कश और कठोर... संगठन इस तरह का कि स्वीडन में मुहम्मद का कार्टून बनता है और दंगे होते हैं दिल्ली में... जनसंख्या है बीस करोड़, मगर कर्म हैं तालीबानी...समझने की बात ये हैं कि कव्वा हमेशा कोकरोच को खाता है... पिछली एक सहस्त्राब्दी से तो यही हो रहा है... जयचंद के वंशज हैं वो लोग जो 'अमन की आशा' की आशा में भेड़ की खाल में सियारों को और घर में बैठे तालिबानी पैरोकारों को शह देते हैं...मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए देश में साम्प्रदायिक दंगों की स्थिति बनाते हैं...जो हाल दिल्ली के सुभाष पार्क का हुआ है- मुल्लों का अतिक्रमण व एक और बाबरी मस्जिद की धमकी... गैर जमानती वारंट के बाद भी देशद्रोही बुखारी का बाल बांका ना होना...जबकि हिन्दू संतों पर अत्याचार... बाबा रामदेव पर हमला... आचार्य बालकृष्ण की गिरफ्तारी...ये सब कांग्रेस की मुल्ला तुष्टिकरण नीति का परिणाम है...निष्कर्ष रूप में यही कहूँगा, इन सबके लिए उत्तरदायी कारण सिर्फ एक है-- असंगठित, छिन्न-भिन्न हिन्दू... समस्त हिन्दुओं... इसके लिए तुम स्वयं जिम्मेदार हो... तुम्हारे अन्दर का पुरुषार्थ खत्म हो चुका है..और स्वार्थ जाग गया है.. तुम्हे देश और सनातन हिन्दू धर्म से कोई लेना देना नही.??तुम सर पर रूमाल बांधकर मुल्लों की लाशों पर सर पटकते ही मर जाओगे...तुम्हारी पिछली पीढ़ियों ने 'शर्म निरपेक्षता' को सींचा है.??और वो अब बबूल बनकर तुम्हारी औलादों को चुभ रही है और चुभती ही रहेगी..अगर 'नपुंसक चुप्पियों' से उठकर संगठित नहीं हुए तो..??'कायर अहिंसक मनोवृति और झूठी शर्म निरपेक्षता' से निकलकर संगठित नहीं हुए तो..??आने वाली पीढ़ी को क्या जवाब दोगे..???अपनी 'मृत आत्मा' के किसी कोने में 'नकली धर्म-निरपेक्षता' की नींद में सोये हुए 'छोटे से जमीर के टुकड़े' से अवश्य पूछना.??
Thursday, 18 October 2012
नीशय करो राष्ट कै हर नागरिक कै हर्दय मैं राष्टभक्ति जाग्रत करेंगे
पराजित देश जब तक पराजित नहीं जब तक अपनी संस्कृति अपने धर्म अपने मुल्यो की रक्षा कर पाता हैं पर क्या भाषा ओर राज्यो ओर धर्म जाती कै नाम पर खण्ड़ खण्ड़ खण्ड़ बटा ये राष्ट आपनी रक्षा कर पायगा आक्रतओ कै इस धरती पर कब्जा करना हैं तो वे व्यक्ति से व्यक्ति को जोड़ने वाली संस्कृति पर आक्रमण करगे सावधान रहेना यदि हमने अपनी संस्कृति अपने धर्म की रक्षा नहीं की तो हमारे राष्ट का पतन नीशत हैं इसलिए शिघ्र ही इस राष्ट की सुबध चेतना को जाग्रत नहीं किया गया तो विनाश निशंत हैं यदि शिघ्र ही राष्ट को एकत्रित नहीं किया तो तो हिन्दू संस्कृति का पतन निशंत हैं इस राष्ट मैं शक्ति हैं पर वो सोई हूई हैं उसे जाग्रत करो इस सोए हूए हिन्दू समाज को जाग्रत करो इस राष्ट दोरोही कांग्रेस भ्रष्टनेतृत्व को उखाड़ फेको उस समार्थ को जाग्रत करो जो इस राष्ट मैं हैं पर ध्यान रहे सवत्रंता का यग्य योवन का बलीदान मांगेगा सावार्थ का बलीदान मांगेगा ओर ध्यान रहे जाग्रत हो रही रण चड़ीका जीवन का बलीदान मांगेगी नीशय करो राष्ट कै हर नागरिक कै हर्दय मैं राष्टभक्ति जाग्रत करेंगे आप अच्छा लिखते हो लिखो आप अच्छा बोलते हो तो बोलो पर राष्ट को जाग्रत करो मा भारती हम सब का मार्ग प्रश्नश करें हर हर माहादेव
