Thursday, 27 September 2012

स्‍वाभिमानी राष्‍ट्र गुलामी के कलंकों को बर्दाश्‍त नहीं करते



काशी की  ज्ञानवापी मस्जिद, कृष्‍ण जन्‍मभूमि पर बनी  ईदगाह तथा देश के मंदिरों को  तोड़कर बनाई गई हजारों मस्जिदें राष्‍ट्रीय  अपमान और गुलामी की प्रतीक  हैं। औरंगजेब को काशी और मथुरा में मस्जिद बनाने  के लिए और भी काफी स्थान  थे। बाबर को भी मस्जिद बनाने के लिए पूरी  अयोध्‍या थी लेकिन उसने  श्रीराम-जन्‍मभूमि मंदिर को ध्‍वस्त कर उसी स्थान  पर मस्जिद का ढांचा खड़ा  करने की कोशिश की। इसी तरह औरंगजेब ने भी   ज्ञानवापी मंदिर तथा  श्रीकृष्‍णजन्‍मभूमि मंदिर के स्थान पर ही मस्जिदें  बनवाई। स्पष्ट है कि  ये मस्जिदें विदेशी हमलावरों की विजय और भारत की हार  और अपमान के स्मारक  हैं। कोई भी स्वाभिमानी और स्वतंत्र राष्ट्र गुलामी की  निशानियों को  सहेजकर नहीं रखता, बल्कि उन्‍हें नष्ट कर देता है।
रूसियों ने चर्च को ध्‍वस्‍त किया
भारत  के शासकों की स्वाभिमान-शून्‍यता और निर्लज्‍जता ऐसी है कि वे इन   शर्मनाक-स्मारकों की सुरक्षा में जुटे हुए हैं। वर्तमान सत्ताधीशों की   सत्ता लोलुपता तो देखिए कि काशी और मथुरा के कलंकों की सुरक्षा के लिए   उन्‍होंने कानून तक बना दिये हैं। यही नहीं काशी-विश्वनाथ में जलाभिषेक   होता है तो सारे सेकुलर-सियार हू-हू करना शुरु कर देते हैं। मथुरा में यज्ञ   करने की बात आती है तो आसमान सर पर उठा लिया जाता है। पूरी केन्‍द्र  सरकार  हरकत में आ जाती है, केन्‍द्रीय मंत्री मथुरा में पहुंच जाते हैं,  जबकि इन  मंत्रियों को कश्मीरी विस्थापितों की सुध लेने की याद तक भी नहीं  आती है।  एक ओर भारत के हुय्मरानों की यह ‘आत्‍म-गौरवहीनता’ है तो दूसरी ओर  ऐसे  राष्ट्रों के उदाहरण हैं जिन्‍होंने गुलामी के निशानों को जड़ सहित  मिटा  दिया।
आर्नोल्ड टॉयन्‍बी आधुनिक युग के सर्वश्रेष्ठ इतिहासकार  माने जाते हैं।  सन 1960 में श्री टॉयन्‍बी ‘अब्‍दुल कलाम आजाद स्मृति  व्याख्यानमाला’ में  बोलने के लिए दिल्ली आये। ‘भारत और एक विश्व’ विषय पर  उनके तीन भाषण हुए।  ‘नेशनल बुक ट्रस्ट’ ने ये तीनों भाषण एक पुस्तक के रूप  में प्रकाशित किये  हैं। श्री टॉयन्‍बी ने अपने भाषण में पोलैंड का एक  उदाहरण दिया कि किस  प्रकार पोलैंड ने स्वतंत्र होते ही रूसियों द्वारा  बनवाया गया चर्च ध्‍वस्त  कर दिया। श्री टॉयन्‍बी के शब्‍दों में,
”सन्  1914-15 में रूसियों  ने पोलैंड की राजधानी वार्सा को जीत लिया तो  उन्‍होंने शहर के मुख्य चौक  में एक चर्च बनवाया। रूसियों ने यह  पोलैंडवासियों को निरन्‍तर याद करवाने  के लिए बनवाया कि पोलैंड में रूस का  शासन है। जब पोलैंड 1918 में आजाद हुआ  तो पोलैंडवासियों ने पहला काम उस  चर्च को ध्‍वस्त करने का किया, हालांकि  नष्ट करने वाले सभी लोग ईसाई मत को  मानने वाले ही थे। मैं जब पोलैंड पहुंचा  तो चर्च ध्‍वस्त करने का काम  समाप्‍त हुआ ही था। मैं एक चर्च को ध्‍वस्‍त  करने के लिए पोलैंड को दोषी  नहीं मानता क्‍योंकि रूस ने वह चर्च राजनीतिक  कारणों से बनवाया था। उनका  मन्‍तव्‍य पोल लोगों का अपमान करना था।‘’
उसी भाषण में श्री टॉयन्‍बी ने आगे कहा कि, ‘इसी   सिलसिले में मैं काशी और मथुरा की मस्जिदों का जिक्र करना चाहूंगा।   औरंगजेब ने अपने दुश्मनों को अपमानित करने के लिए जान-बूझकर इन मंदिरों को   मस्जिदों में बदल डाला, उसी दुर्भावना के कारण जिसके कारण कि रूसियों ने   वार्सा में चर्च बनाया था। इन मस्जिदों का उद्देश्य यह सिद्ध करना था कि   हिन्‍दुओं के पवित्रतम स्थानों पर भी मुसलमानों की हुकूमत चलती है।”
श्री  टॉयन्‍बी के अनुसार पोलिश लोगों ने समझदारी का काम किया क्‍योंकि  चर्च  ध्‍वस्त करने से रूस और पोलैंड के बीच की शत्रुता की भावना समाप्‍त हो  गई।  वह चर्च पोल लोगों को रूस के आक्रमण की याद दिलाता रहता था। आर्नोल्ड   टॉयन्‍बी ने इस बात पर खेद प्रकट किया कि हिन्‍दुस्थान के लोग हिन्‍दू और   मुस्लिमों में तनाव की जड़ इन मस्जिदों को हटा नहीं रहे हैं। उन्‍होंने यह   कह कर अपनी बात समाप्‍त की कि, ‘’भारत की इस सहिष्‍णुता से मैं स्‍तभ्भित   हूं साथ इससे मुझे अपार पीड़ा भी हुई है।‘’
नास्तिक रूसियों ने मूर्तियां स्‍थापित कीं
यह  उन दिनों की घटना है जब रूस में साम्यवाद अपने उफान पर था। सन 1968  में  भारत के सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल लोकसभा के तत्‍कालीन अध्‍यक्ष  नीलम  संजीव रेड्डी के नेतृत्‍व में रूस गया। रूसी दौरे के समय सांसदों को   लेनिनग्राद शहर का एक महल दिखाने भी ले जाया गया। वह रूस के ‘जार’ (राजा)   का सर्दियों में रहने के लिए बनवाया गया महल था। महल को देखते समय संसद   सदस्यों के ध्‍यान में आया कि पूरा महल तो पुराना लगता था किन्‍तु कुछ   मूर्तियां नई दिखाई देती थीं। पूछताछ करने पर पता लगा कि वे मूर्तियां   ग्रीक देवी-देवताओं की हैं। सांसदों में प्रसिद्ध विचारक तथा भारतीय मजदूर   संघ के संस्थापक श्री दत्तोपंत ठेंगड़ी भी थे। उन्‍होंने सवाल किया कि,  ‘आप  तो धर्म और भगवान के खिलाफ हैं, फिर आपकी सरकार ने देवी-देवताओं की   मूर्तियों को फिर से बनाकर यहां क्‍यों रखा है?’ इस पर साथ चल रहे रूसी   अधिकारी ने उत्तर दिया, ‘इसमें कोई शक नहीं कि हम घोर नास्तिक हैं किन्‍तु   महायुद्ध के दौरान जब हिटलर की सेनाएं लेनिनग्राद पर पहुंच गई तो वहां हम   लोगों ने उनसे जमकर संघार्ष किया। इस कारण जर्मन लोग चिढ़ गये और हमारा   अपमान करने के लिए उन्‍होंने यहां की देवी-देवताओं की प्राचीन मूर्तियां   तोड़ दी। इसके पीछे यही भाव था कि रूस का राष्ट्रीय अपमान किया जाये। हमारी   दृष्टि में हमें ही नीचा दिखाया जाये। इस कारण हमने भी प्रणा किया कि   महायुद्ध में हमारी विजय होने के पश्चात् राष्ट्रीय सम्मान की पुनर्स्थापना   करने के लिए हम इन देवताओं की मूर्तियां फिर से स्थापित करेंगे।
रूसी  अधिकारी ने आगे कहा कि, ‘हम तो नास्तिक हैं ही किन्‍तु मूर्ति भंजन  का  काम हमारा अपमान करने के लिए किया गया था और इसलिए इस राष्‍ट्रीय अपमान  को  धो डालने के लिए हमने इन मूर्तियों का पुनर्निर्माण किया।‘
ये मूर्तियां आज भी जार के ‘विन्‍टर पैलेस’ में रखी हैं और सैलानियों के मन में कौतुहल जगाती हैं।
दक्षिण कोरिया की कैपिटल बिल्डिंग
दक्षिण  कोरिया अनेक वर्षों तक जापान के कब्‍जे में रहा है। जापानी  सत्ताधारियों  ने अपनी शासन सुविधा के लिए राजधानी सिओल के बीचों-बीच एक  भव्य इमारत बनाई  और उसका नाम ‘कैपिटल बिल्डिंग’ रखा। इस समय इस भवन में  कोरिया का  राष्ट्रीय संग्रहालय है। इस संग्रहालय में अनेक प्राचीन वस्तुओं  के साथ  जापानियों के अत्‍याचारों के भी चित्रा हैं।
वर्ष 1995 में दक्षिण  कोरिया को आजाद हुए पचास वर्ष पूरे हो रहे हैं।  अत: वहां की सरकार आजादी  का स्‍वर्ण जयंती वर्ष’ धूमधाम से मनाने की तैयारी  कर रही है। इस  स्वतंत्राता प्राप्ति की स्‍वर्णा जयंती महोत्‍सव का एक  प्रमुख कार्यक्रम  होगा ‘कैपिटल बिल्डिंग’ को ध्‍वस्त करना। दक्षिण कोरिया  की सरकार ने इस  विशाल भवन को गिराने का निर्णय ले लिया है। इसमें स्थित  संग्रहालय को नये  बन रहे दूसरे भवन में ले जाया जायेगा। इस पूरी कार्रवाई  में 1200 करोड़  रुपये खर्च होंगे।
यह समाचार 2 मार्च 1995 को बी.बी.सी. पर प्रसारित  हुआ था। कार्यक्रम में  ‘कैपिटल बिल्डिंग’ को भी दिखाया गया। इस भवन में  स्थित ‘राष्ट्रीय वस्तु  संग्रहालय’ के संचालक से बीबीसी संवाददाता की  बातचीत भी दिखाई गई। जब उनसे  इस इमारत को नष्ट करने का कारण पूछा गया तो  संचालक महोदय ने बताया कि,  ‘इस  इमारत को देखते ही हमें जापान द्वारा हम  पर लादी गई गुलामी की याद आ जाती  है। इसको गिराने से जापान और दक्षिण  कोरिया के बीच सम्‍बंधों का नया दौर  शुरु हो सकेगा। इसके पीछे बना हमारे  राजा का महल लोगों की नजरों से ओझल रहे  यही इसको बनाने का उद्देश्‍य था और  इसी कारण हम इसको गिराने जा रहे हैं।‘
दक्षिण कोरिया की जनता ने भी सरकार के इस निर्णय का उत्‍साहपूर्वक स्‍वागत किया। (यह भवन उसी वर्ष ध्‍वस्‍त कर दिया गया।)
पांच  सौ साल पुराने गुलामी के निशान मिटाये कुछ वर्ष पहले तक  युगोस्‍लाविया एक  राज्‍य था जिसके अन्‍तर्गत कई राष्‍ट्र थे। साम्‍यवाद के  समाप्‍त होते ही  ये सभी राष्‍ट्र स्‍वतंत्र हो गये तथा सर्बिया, क्रोशिया,  मान्‍टेनेग्रो,  बोस्निया हर्जेगोविना आदि अलग-अलग नाम से देश बन गये।  बोस्निया में अभी  भी काफी संख्‍या में सर्ब लोग हैं। ऐसे क्षेत्रों में  जहां सर्ब काफी  संख्‍या में हैं, इस समय (सन् 1995) सर्बियाई तथा बोस्निया  की सेना में  युद्ध चल रहा है। इस साल के शुरु में सर्ब सैनिकों ने बोस्निया  के कब्‍जे  वाला एक नगर ‘इर्वोनिक’ अपने अधिकार में ले लिया।
इर्वोनिक की एक  लाख की आबादी में आधे सर्ब हैं और शेष मुसलमान। सर्ब  फौजों के कब्‍जे के  बाद मुसलमान इस शहर से भाग गये तथा बोस्निया के ईसाई  यहां आ गये। ब्रंकों  ग्रूजिक नाम के एक सर्ब नागरिक को शहर का महापौर भी  बना दिया गया। महापौर  ने सबसे पहले यह काम किया कि नगर के बाहर बहने वाली  ड्रिना नदी के किनारे  बनी एक टेकड़ी पर एक ‘क्रास’ लगा दिया। महापौर ने  बताया कि, ‘इस स्‍थान पर  हमारा चर्च था जिसे तुर्की के लोगों ने सन् 1463  में ध्‍वस्‍त कर डाला  था। अब हम उस चर्च को इसी स्‍थान पर पुन: नये सिरे से  खड़ा करेंगे।‘ श्री  ग्रूजिक ने यह भी कहा कि तुर्कों की चार सौ साल की  सत्ता में उनके द्वारा  खड़े किये गये सारे प्रतीक मिटाये जाएंगे। उसी  टेकड़ी पर पुराने तुर्क  साम्राज्‍य के रूप में एक मीनार खड़ी थी उसे सर्बों  ने ध्‍वस्‍त कर दिया।  टेकड़ी के नीचे ‘रिजे कॅन्‍स्‍का’ नाम की एक मस्जिद  को भी बुलडोजर चलाकर  मटियामेट कर दिया गया।
यह विस्‍तृत समाचार अमरीकी समाचार पत्र  हेरल्‍ड ट्रिब्‍युन में 8 मार्च  1995 को छपा। समाचार लाने वाला संवाददाता  लिखता है कि उस टेकड़ी पर पांच सौ  साल पहले नष्‍ट किये गये चर्च की एक  घंटी पड़ी हुई थी। महापौर ने अस्‍थायी  क्रॉस पर घंटी टांककर उसको बजाया।  घंटी गुंजायमान होने के बाद महापौर ने  कहा कि, ‘मैं परमेश्‍वर से  प्रार्थना करता हूं कि वह क्लिंटन (अमरीकी  राष्‍ट्रपति) को थोड़ी अक्‍ल दे  ताकि वह मुसलमानों का साथ छोड़कर उसके  सच्‍चे मित्र ईसाइयों का साथ दे।
सोमनाथ का कलंक मिटाया गया
भारत  में जब तक सत्ता की भूख नेताओं के सर पर सवार नहीं हुई थी, गुलामी  के  प्रतीकों को मिटाने का प्रयत्‍न किया गया। नागपुर के विधानसभा भवन के   सामने लगी रानी विक्‍टोरिया की संगमरमर की मूर्ति आजादी के बाद हटा दी गई।   मुम्‍बई के काला घोड़ा स्‍थान पर घोड़े पर सवार इंग्‍लैंड के राजा की   प्रतिमा हटाई गई। विक्‍टोरिया, एंडवर्ड और जार्ज पंचम से जुड़े अस्‍पताल,   भवन, सड़कों आदि तक के नाम बदले गये। लेकिन जब सत्ता का स्‍वार्थ और चाहे   जैसे हो सत्ता में बने रहने की अंधी लालसा जगी तो दिल्‍ली की सड़कों के नाम   अकबर, जहांगीर, शाहजहां तथा औरंगजेब रोड तक रख दिये गये।
भारत के  आजाद होते ही सरदार पटेल ने सोमनाथ का जीर्णोद्धार कराया। उस  स्‍थान पर  बनी मस्जिदों व मजारों को ध्‍वस्‍त कर भव्‍य मंदिर का निर्माण  कराया गया।  मंदिर की प्राण-प्रतिष्‍ठा के समारोह में सेकुलरवादी पं. नेहरु  के विरोध  के बावजूद तत्‍कालीन राष्‍ट्रपति डॉ. राजेन्‍द्र प्रसाद सम्मिलित  हुए। उस  समय किसी ने मुस्लिम भावनाओं की या मस्जिदें नष्‍ट न करने की बात  नहीं  उठाई। इसलिए कि उस समय सरदार पटेल जैसे राष्‍ट्रवादी नेता थे और देश  की  जनता में भी आजाद के आंदोलन का कुछ जोश बाकी था।  उसी तरह नरेंद्र मोदी जैसा देश भक्त देश को चाहिए

Thursday, 20 September 2012

आप अपने बच्चों को ऐसा भारत देना चाहते हो ?

जिसने जन्म लिया है उसे एक दिन अवश्य मरना भी है, आपको भी 3 दिन बाद मरना है. 3 दिन बाद आपको फांसी दे दी जायेगी .आपकी मौत निश्चित है....
अब आप उस मौत के दर्द को महसूस किजिये ..... आपका परिवार और सब कुछछूट जायेगा.....
क्या आप अपने गले मे फांसी का फन्दा सोच कर कांप गये ????
अब सोचो भगत सिंह जैसे अनगिनत शहिदों को जो हंसते हंसते देश के लिये फांसी पर चढ गये थे .....
महसूस करो उनके दर्द को, और देखो आज के भ्रष्टाचार से भरे भारत को , क्या ऐसा भारत बनाने के लिये उन्होने अपनी जान की कुर्बानी दी थी ....
अब मरने की कल्पना से बाहर आइये और सोचिये ......
जब वो लोग देश के लिये मर सकते है तो क्या आप देश के लिये जी भी नहीं सकते ?????????आप लम्बी उमर जिये लेकिन ना आप बदले ना देश बदला, 20-25 साल बाद आपके बच्चे, पोते, नाती सब एक ऐसे देश मे जी रहे है जिसकी हालत सोमालिया आदि देशो से भी बदतर है , बेहिसाब आबादी है , हर तरफ मारकाट मची है, कोई कानून नहीं है, जंगलराज की सी हालत है , सभी जातियाँ कबिलों की तरह लड रही है . भूख से बेहाल गरीब अमीरों को लूट रहें हैं, अमीर उनपर गोलिया चला रहे हैं , एक पल का भी भरोसा नहीं है कब कौन आपके बच्चों को अनाथ कर दे या बच्चो को किड्नेप कर ले.
क्या आप अपने बच्चों को ऐसा भारत देना चाहते हो ? आप अपनेबच्चों को हर चीज देते है , अच्छी शिक्षा , अच्छे कपडे, अच्छे गेजेट्स ....
फिर क्या आप उन्हे अच्छा भारत नहीं देंगे ??????

Wednesday, 19 September 2012

असली माहानायक हिन्दुस्थान का

नरेन्‍द्र मोदी एक नाम होकर एक मंत्र हो गया है। न सिर्फ सर्मथक अपि‍तु असमर्थक भी अपने आपको मोदी महिमा के गुण गान से नही रोक पा रहे है। क्‍या बात हो गई कि एक व्‍यक्ति को कहा जा रहा है कि वह व्‍यवस्‍था पर भारी पड़ रहा है? अगर एक व्‍यक्ति पूरी व्‍यवस्‍था पर भारी पढ़ रहा है तो उसमें कुछ न कुछ तो बात जरूर होगी।मै बात करूँ तो मै मोदी को तब से जानता हूँ जब वह भाजपा के राष्‍ट्रीय महासचिव हुआ करते थे, और मै मोदी को कभी पंसद नही करता था। जब गुजरात के मुख्‍यमंत्री के रूप में मोदी की ताजपोशी हुई तो मुझे कतई यह नेता अच्‍छा नही लगता था। कारण था कि मुझे मोदी की सूरत पंसद नही थी किन्‍तु बाद सीरत का कायल हो गया। आज यह नेता मुझे ही नही पूरे देश के युवाओं की आखों का तारा बन गया है। जो भी है वह मोदी के गुणगान कर रहा है। और होना भी चाहिए।गोधरा के बाद जो कुछ गुजरात में हुआ वह वक्‍त की जरूरत थी। क्‍योकि गोधरा में जिस प्रकार 59 कारसेवक जिन्‍दा जलाये गये वह दृश्‍य दिल दहला देने वाला था। क्‍या हिन्‍दू के वोट के तरजू मे हिन्‍दू के प्राणों का मोल नही होता है? इन राजनितिज्ञों की चालों से तो यही लगता है। गुजरात दंगों के समय जो हाय तौबा मची उससे तो यही प्रतीत होता है कि राजनीति में वोट की ही कीमत है, तभी जाहिरा और शराहब्‍बुदीन का दर्द दिखता है किन्‍तु वही जलती हुई ट्रेन और सिक्‍ख का खुले आम कत्‍ले आम नही दिखता है। क्‍या वह दृश्‍य सोचा जा सकता है कि एक हज यात्रा की बस को जला दिया जाता? यह तो केवल एक प्रश्‍न है जबकि दृश्‍य आपके सामने ही प्रकट कर देते है। आगरा में बस की टक्‍कर से जिस प्रकार एक मुस्लिम छात्र की मौत हुई, उसके जवाब में आगरा में कई इलाकों की हिन्‍दू दुकानों को निशाना बना कर लूँट लिया गया, तथा इलाहाबाद में कुरान के पन्‍ने फाड़े जाने के षड़यत्र का खुद ही पर्दाफाश हो गया किन्‍तु इसके परिणाम स्‍वरूप अगर नुक्‍सान हुआ तो सिर्फ हिन्‍दूओं का कारण है कि सेक्‍यूलन पार्टियों की नज़र मे हिन्‍दू केवल जाति में बटी हुई नाजायद औलाद है जब मन चाहा बॉंट कर वोट ले लिया। मऊ की घटना सभी को याद है कि मुलायम की शह पर मारे गये तो सिर्फ हिन्‍दु। अगर बेस्‍ट बेकरी की बात करें तो उसमें मरने वाले हिन्‍दू ही थे। जाहिरा की आना कानी काफी सच कहती है कि सच क्‍या था?आज उक्‍त बात यह बताती है कि गुजराज के हिन्‍दुओं ने बता दिया हिन्‍दुओं की ओर उठने वाली ऑंखे नोच ली जायेगी तो गलत क्‍या है? इतिहास गवाह है कि भाजपा के शासन के पहले जब काग्रेस का शासन था तो लगातार 10 वर्षो तक गुजरात सम्प्रदायिक दगें हुऐ किन्‍तु गुजरात दंगों के बाद पिछले साल 10 सालों में कोई दंगा नही हुआ इस मामले में एक वरिष्‍ठ पत्रकार कहते है कि गुजराज दंगो के बाद मुसलमान सहम गया है। अर्थात अगर दंगो की वजह से दंगें बन्‍द है तो क्‍यो न एक बार समर छिड़ जाने दे, कि दंगें हमेशा के लिये बन्‍द हो जाये? अगर गुजराज में आज समरसता है तो इसका कारण केवल और केवल मोदी है जो गुजराज में समाज के सन्‍तुलन को बरकारर कर दिया है। नही तो समाज के मुट्ठी भर लोग 85 प्रतिशत वाले भाग पर भारी पड़ते थे। और समय समय पर वैमन्‍यस्‍य फैलाते थे।यही कारण है कि आज यत्र सर्वत्र मोदी मंत्रोच्‍चरण हो रहा है। और मोदी भाजपा पर भारी हो गये है। और यदि मोदी भाजपा पर भारी है तो कौन पिता का ख्‍वाब नही होता है कि उसके बेटे उससे बड़ा नाम हो? अब वह दिन दूर नही जब मोदी के नेतृत्‍व में दिल्‍ली के शासन में भगवा लहरायेगा। अब आज मोदी की प्रंशसा क्‍यो होनी चाहिए यह आप खुद तय कर सकते है ?


Tuesday, 18 September 2012

दोस्तों, क्या आपने कभी सोचा है ?

दोस्तों, क्या आपने कभी सोचा है ? सरकार हर साल लोगों से 134 प्रकार के टैक्स से कितना पैसा जमा कराती है और ये पैसे कहा खर्च हो जाते है? मंदिरों का पैसा सरकार किस मद में खर्च कराती है जिसे सिर्फ हिन्दू दान देकर इकठ्ठा करता है, ये बहुत बड़ा प्रश्न है. काले धन का इतिहास क्या है, पहले कपिल सिब्बल ने कहा कोई भी नुकसान २ जी घोटाले में नहीं हुआ है, फिर अहलुवालिया ने कहा की हा वास्तव में कोई घोटाला नहीं हुआ है, फिर मनमोहन ने कहा इसकी जाँच चल रही है, विपक्ष को टालते रहे, राजा जैसा आदमी जिसके पास अपनी मोबाइल को टाप अप करने का पैसा नहीं हो, यदि वह अपनी पत्नी के नाम 3000 करोड़ रुपया मारीशाश में जमा कर दे फिर आया महा घोटाला देवास-इसरो डील का जिसमे की 205000 करोड़ की बैंड विड्थ को मात्र 1200 करोड़ के 10 साल के उधार के पैसे में दे दिया गया, भला हो सुब्रमनियम स्वामी जी का जिन्हें इन चोरो को नंगा कर दिया, हमारी कांग्रेसी और विदेशी मिडिया सुब्रमनियम स्वामी की तस्वीर हमेशा से गलत पेश किया है जब की वास्तव में भारत देश को ऐसे ही इमानदार नेताओ की जरुरत है जिसने कभी भी चोरी के बारे में सोचा ही नहीं, फिर आया कामनवेल्थ खेल का 90000 करोड़ का घोटाला, फिर कोयला का घोटाला जिसमे ठेकेदारों द्वारा 10 पैसे प्रति किलो के भाव से कोयला खरीदा जाता है और उसे बाजार में 4 रुपये किलो तक बेचा जाता है, यह रकम अब तक 26 लाख करोड़ होती है, इटली के 8 बैंक और स्वीटजरलैंड के 4 बैंको को 2005 में भारत में क्यों खोला गया है और इसमे किसका पैसा जमा होता है, ये बैंक किसको लोन देते है और इनका ब्याज क्या है, इनकी जरुरत क्यों आ पड़ी भारत में जब की भारत के ही बैंकरों की बैंक खोलने की अर्जियाँ सरकार के पास धूल खा रही है, इन बैंको को चोरी छुपे क्यों खोला गया है, इन बैंको आवश्यकता क्यों है जब भारत में 80% लोग 20 रूपया प्रतिदिन से भी कम कमाते है. खबर आयी की काला धन है और सबसे ज्यादा भारतीयों का है, यह स्विस बैंको के आलावा 70 और दुसरे देसों में जमा है, सरकार ने कहा की टैक्स चोरी का मामला है, हम उन देशो से समझौते कर रहे है, जिससे की दोहरा कर न देना पड़े, यह टैक्स चोरी नहीं भारत देशको लूट डालने का मामला है जिसकी सजा किसान से पूंछो तो सिर्फ मौत देना चाहता है वह भी सब कुछ वसूल लेने के बाद, फिर बात आई की यदि ये भ्रष्टाचारी और लुटेरे इसमे से 15% टैक्स सरकार को दे तो इसे भारत के बैंको में जमा करने दिया जायेगा और किसी को यह हक़ नहीं होगा की वह पूछे की या इतना पैसा कैसे कमाया या लूटा. सरकार इस पर एक कानून ला रही है, क्यों? किसको बचाया जा रहा है? इन्ही लोगो की वजह से भारत में इतनी महागायी है की लोग शादी खर्च से बचने के लिए बेटियों की जान ले ले रहे है, किसान आत्महत्या कर रहा ई, गरीब दवा नहीं करा रहा है, बच्चे स्कुल नहीं जा रहे है, इन्हें तो किसी कीमत पर नहीं छोड़ा जा सकता है, ये यूरिया घोटाला करते है और यूरिया किसान को दुगुने दाम बचा जाता है, फिर गेहू सस्ते में खरीदा जाता है, और अब तो घोटाला 115% हो जायेगा, 115 चुराओ, 15 सरकार को देकर 100 खुद रख लो. हमारे देश में क्यों अनुसन्धान के लिए पर्याप्त पैसा नहीं दिया जाता है, यह कीसकी चाल है, जिसकी वजह से हम 5-10 गुना दाम में विदेशी चीजे खरीदते है, ऐसे कौन से कारण है जिनके कारन हम नेहरू के द्वारा ट्रांसफर अफ पॉवर अग्रीमेंट 14 अगस्त 1947 को दस्तखत करने के बाद भी आज तक विक्सित नहीं बन पाए, जब की हमारी जनता हफ्ते में 90 घंटा काम करती है जबकि कामचोर अंग्रेज हफ्ते में सिर्फ 30 घंटा काम करते है, क्या कारण है की हमारे 45 रुपये में 1 डालर और 90 रुपये में 1 पौंड मिलाता है, जब की 1947 में 1 रुपये में 1 डालर मिलता था. क्या कारण है की हमारे देश में एक भी सोलर ऊर्जा वैज्ञानिक नहीं है और दुनिया भर के परमाणु वैज्ञानिक है जो हमें हमेशा झूठा अश्वाव्हन देते है की यह परमाणु बिजली सस्ती और निरापद है भारत की परमाणु से सम्बंधित कुल बाजार 750 लाख करोड़ का होगा. जब की हम भारत में 400000 मेगावाट सोलर बिजली बना सकते है, हम अभी तक सुरक्षित अन्ना भण्डारण की व्यवस्था क्यों नहीं बना पाए जब की हमारे पास धन की कमी ही नहीं है, क्योकि अन्न को सडा दिखाकर उसे कौड़ियो के भाव शराब माफिया को बचा जाता है जब की गरीब अन्ना बिना मर रहा है, इसके लिए तो कोई एक व्यक्ति जिम्मेदार होगा, उसकी सजा क्या है, मीडिया को निष्पक्ष बनाने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है, सभी भारतीयों को पता चल गया है की मिडिया , टीवी और पत्रिकाए सरकार को बिक चुकी है, बड़े शर्म की बात है, अगर देश में 2 लाख करोड़ रुपये की नकदी सर्कुलेशन में है तो देश की अर्थव्यवस्था करीब 100 लाख करोड़ रुपयों की होती है. और हमारे देश में रिजर्व बैंक अबतक लगभग 18 लाख करोड़ रुपयों के नोट छाप चुका है और कमसे कम 10 लाख करोड़ रुपये सर्कुलेशन में है. इस हिसाब से देश की अर्थव्यवस्था करीब 400 से 500 लाख करोड़ रुपये होनी चाहिए लेकिन अभी हमारी अर्थव्यवस्था केवल 60 लाख करोड़ की है. जबकि इतनी अर्थव्यवस्था के लिए दो लाख करोड़ से भी कम सर्कुलेशन मनी की जरूरत है. अगर 400 लाख करोड़ रूपये का काला धन देश में वापिस आ जाता है तो देश की अर्थव्यवस्था करीब 20,000 लाख करोड़ रुपये होगी ... क्या आप जानते हैं कि इस समय अमेरिका सबसे शक्तिशाली देश है और उसकी अर्थव्यवस्था करीब 650 लाख करोड़ की है... मतलब 400 लाख करोड़ रुपये वापिस मिलने पर हम अमरीका से भी 30 गुना ज्यादा शक्तिशाली बन सकते है.

DESTROY ISLAM OR GET DESTROYED BY IT

आत्मरक्षा में हिन्दू हथियार न उठोयें तो क्या इन राक्षसों के हाथों निहथा मरें ?

आप बास्तब में अगर देश में शान्ति चाहते हैं तो इस जानकारी को ध्यान से देखने और पढ़ने के बाद खुदवाखुद चिल्ला उठेंगे कि जब सराकरें मानबता के हत्यारों के साथ जा खड़ी हुई हैं तो हिन्दू के पास आत्मरक्षा में हथियार उठाने शिवा कोई चारा नहीं!

 

ये वो बैनर है जो मानबता के हत्यारों ने कशमीर घाटी में जगह-जगह चिपकाकर हिन्दूमिटाओ-हिन्दूभगाओ षडयन्त्र की शुरूआत

  

ये हैं वो सैनिक जिनके कन्धों पर भारतीयों की रक्षा की जिम्मेदारी है लेकिन चोरों ,गद्दारों और लुटेरों की सेकुलर(काँग्रेस) सरकार ने इनके हाथ इस कदर बान्ध दिए हैं कि ये खुद इसलामिक आतंकवादियों से पिटने-मरने को मजबूर हैं अब आप ही बताओ जिनको अपनी रक्षा का अधिकार नहीं वो भला दयावान-लाचार-शान्तिप्रिय हिन्दूओं की रक्षा कैसे करेंगे

अगर कहीं  ये सैनिक आत्मरक्षा में किसी इसलामिक आतंकवादी को मार गिराते हैं तो उसे फर्जी मुठभेड़ करार देकर आतंकवादियों को मारने वाले बहादुर सैनिकों को जेलों में डाल दिया जाता है

(आज सैंकड़ों सैनिक व अन्य सुरक्षा बलों के जवान देशभक्ति की सजा जेलों में भुक्तने को मजबूर हैं)

 

सैनिकों द्वारा अपना खून बहाकर देश के लिए किए गए काम को किस तरह इन गद्दार समर्थक सरकारों ने बर्बाद किया उसी को दर्शाता है ये ब्यान

मुम्बई दंगा करवाने वालों के साथ वही गृहमन्त्री खड़ा है जिसे इससे पहले एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो(सोनिया गाँधी) के ऐजेंट अहमद पटेल व इसालमिक आतंकवादी के साथ बैठकर मुंम्बई का पुलिस कमीशनर की नियुक्त तय करते हुए कैमरे में कैद किया गया था

जब आतंकवादियों के इसारे पर सराकर काम करे तो इसके शिवा और क्या हो सकता है

वन्देमातरम् का विरोध….भारत माता को गाली----सैनिकों पर हमले---अब अमरजवान समारक मतलब देश की आन-वान-शान के लिए कुर्वान होने वाले शहीदों का अपमान

क्या अब भी आप कह सकते हैं कि गद्दार नहीं है मुसलमान

मुसलमानों की गद्दारी का नमूना आप याहं भी देख सकते हैं कि वो इन गद्दारों का किस तरह समर्थन कर रहे हैं

मुसलमानों की धमकियों व हमलों के परिणामस्वारूप हिन्दूओं का पलायन

मुसलमानों के हमलों और हिन्दूओं की इसी भागमभाग में

अफगानिस्तान पाकिस्तान बांगलादेश सब हिन्दुविहीन हो गए।

अब कश्मीर आसाम को हिन्दुविहीन करने के लिए जिहादी हमले जारी हैं।।

आज जिहादी हमलों में वो घरबार परिवार सहित मारे गए।।।

कल हमारी फिर हमारे बच्चों को मारने की तैयारी है।।।।

आपके मन में यही आ रहा होगा

DESTROY ISLAM OR GET DESTROYED BY IT

 हिन्दूओं की सेवा मेंउग्रहिन्दूवादी


Monday, 17 September 2012

जो भारत को अपनी माता नहीं मानते उन्हें भारत में रहने का भी अधिकार नहीं है।

समाज में जब पतन की अवस्था आती है तब समाज के अनेक वर्गों को अत्यंत वेदना का, कष्ट का जीवन व्यतीत करना पड़ता है। मैं नामदेव जी की वेदना से सहमत हूं। मैंने डा.अम्बेडकर का समग्र जीवन पढ़ा है, उनकी पुस्तक "माई थाट्स आन पाकिस्तान" को भी पढ़ा है और औरंगाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति शंकर राव खरात का जीवन परिचय भी मैंने पढ़ा है। कैसी-कैसी परिस्थिति में से इन लोगों को गुजरना पड़ा है, इसे देखकर वास्तव में रोना आता है। शंकरराव खरात की पुस्तक में एक प्रसंग आता है। जब वे छोटे थे, उस समय उनके पिताजी एक ब्राह्मण के यहां गए और कहा कि यह चिट्ठी आई है, इसे पढ़ दीजिए। चूंकि उनके यहां कोई पढ़ा लिखा नहीं था इसलिए वे ब्राह्मण परिवार के पास गए। उन्हें आया देखकर ब्राह्मण पत्नी ने कहा कि अरे! वो आया है, जो एक गाड़ी लकड़ी आई हुई है, उसे फड़वा लीजिए। तो चिट्ठी पढ़वाने के लिए एक गाड़ी लकड़ी उन्हें फाड़नी पड़ी। काम पूरा करने के पश्चात् जब उन्हें चिट्ठी सुनाई गई तो उसमें लिखा था कि उनकी बहन का देहान्त हो गया है।बाद में जब शंकर राव खरात औरंगाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति बने तब उन्होंने टिप्पणी की कि जिनके पिता जी को कभी एक पत्र पढ़वाने के लिए एक गाड़ी लकड़ी फाड़नी पड़ी, उन्हीं का बेटा आज एक विश्वविद्यालय का कुलपति बना है। यदि आज मेरे पिता जीवित होते तो उन्हें कितना आनंद हुआ होता।हमारे समाज का दुर्भाग्य रहा है कि हम अपने ही धर्म को ठीक से समझ नहीं सके। यह हिन्दू समाज का दुर्भाग्य है कि उसका श्रेष्ठ तत्व ज्ञान और व्यवहार दोनों अलग-अलग दिखाई देने लगे। हिन्दू समाज ने बहुत उत्थान-पतन देखे हैं। महाभारत काल में जब पतन हुआ तब भगवान कृष्ण ने गीता के रुप में जो तत्वज्ञान दिया, इस कलियुग में वह हमारे लिए भगवान के द्वारा दी गई स्मृति है। उस समय गीता ज्ञान से शक्ति लेकर देश फिर नवोत्थान की ओर बढ़ा। देश में जब पुन: पतन हुआ तो भगवान बुद्ध आए। आगे जगद्गुरु शंकराचार्य का प्रादुर्भाव हुआ। समाज में बौद्व मत के अतिरेक से जो विकृतियां आईं उसे दूर करते हुए उन्होंने अद्वैत दर्शन की स्थापना की। बौद्ध सिद्धांतों को भी उन्होंने स्वीकारा, परिणामत: वे प्रच्छन्न बौद्ध भी कहलाए। वेदांत के माध्यम से सभी मत-मतांतरों को शंकराचार्य ने दूर किया। शंकराचार्य के बाद पुन: स्वर्णकाल आया। बाद में पुन: देश में पतनावस्था आई और इस पतन की पराकाष्ठा हमें 1947 में देश विभाजन के रुप में चुकानी पड़ी। यद्यपि 19वीं सदी में आध्यात्मिक जागरण का प्रारंभ हो चुका था। स्वामी दयानंद, स्वामी रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद, महर्षि अरविंद जैसे महापुरुषों ने, केरल के नारायण गुरु, आलवार, संत ज्ञानेश्वर आदि संतों ने सामाजिक एकता के प्रयत्नों को नई दिशा दी।इसी श्रृंखला में 1925 में रा.स्व.संघ की स्थापना हुई, तभी से हमने कहा कि हम जाति भेद नहीं मानते, पूरे समाज को हम संगठित स्वरुप में खड़ा करेंगे।जाति भेद, छुआछूत समाप्त करने के पीछे हमारा आधार हिन्दू तत्व ज्ञान ही है। हिन्दू तत्व ज्ञान जड़-चेतन सभी में एक ही आत्मतत्व की उपस्थिति मानता है। हम सब भारत माता के पुत्र हैं, यह भाव सभी में उत्पन्न करना, यही संघ का लक्ष्य है।  प्रत्येक भारतीय को वन्दे मातरम् गाना चाहिए। जो भारत को अपनी माता नहीं मानते उन्हें भारत में रहने का भी अधिकार नहीं है।

Sunday, 16 September 2012

हम हिन्दू मूलो कै शदीयो बाप थे वर्तमान हैं ओर हमेशा रहेंगे

मुस्लिम अक्सर छाती फुला कर और बहुत गर्व से एक बात बोलते हैं कि.....हमारा इस्लाम बहुत अच्छा है.... और, दुनिया में इस्लाम के लगभग 56 देश हैं .....!हालाँकि.... इस बात पर ज्यादा आश्चर्य नहीं किया जाना चाहिए ... क्योंकि.... एक मूर्ख, हमेशा मूर्खता भरी बातें ही करेगा..... और ये जगजाहिर है कि....... मुल्लों से बड़ा मूर्ख ना आज तक कोई हुआ है...... ना ही अगले हजार... दो हजार साल... तक होने के आसार हैं...!लेकिन.... मुल्लों की ऐसी बातें बातें सुनकर... कुछ अज्ञानी और सेक्यूलर किस्म के हिन्दू .... इस्लाम से प्रभावित हो जाते हैं........ और, उन्हें भी मुल्लों की बात कही बात सच लगने लगती है.....!लेकिन..... सच्चाई ...... कुछ और ही है..... और, इसके बिल्कुल ही विपरीत है......बेशक ..... दुनिया में लगभग 56 देश हैं....... लेकिन..... वे बहुत ही छोटे छोटे और टुच्चे से देश हैं......उनमे से कुछ लीबिया-फीबिया.... जैसे देश तो... हमारे उत्तराखंड से भी छोटे हैं.....!मिस्र , लेबलान, ब्रुनेई , बांग्लादेश, क़तर , मालद्वीप, सोमालिया .... जैसे अनेकों देश हमारे झारखण्ड और उत्तरांचल जैसे छोटे छोटे हैं.यहाँ तक कि.... मुस्लिमों का सबसे बड़ा देश पिग्गिस्तान (आबादी लगभग 17 करोड़) .... भी.... हमारे उत्तर प्रदेश (आबादी लगभग 20 करोड़) भी छोटा है..... !उस पर मजे की बात ये है कि...... अधिकतर मुस्लिम देशों में भुखमरी छाई रहती है...... और ... वहां खाने के भी लाले पड़े हुए हैं...... बाकी मूलभूत सुविधाओं की बात तो खैर जाने ही दो....अब अगर आबादी की चर्चा करें तो....... पिछले 1400 सालों से ... तलवार, बम और आतंक के जारी इस्लाम को फ़ैलाने ... तथा ""सूअरों की तरह बच्चा पैदा करने के बावजूद"" भी...... दुनिया में मुस्लिम की संख्या मात्र 130 करोड़ के आसपास है...(दुनिया की कुल आबादी 700 करोड़ है).और तो और..... हमारे हिंदुस्तान की ही आबादी..... 124 करोड़ के आसपास है..... जिसमे से 20 करोड़ मुस्लिम और.... 4 करोड़ अन्य को निकाल भी हम हिन्दुओं की आबादी 100 करोड़ है..... जबकि हमने कभी भी ... अपने सनातन धर्म को जबदस्ती नहीं फैलाया...... ना ही किसी से "जजिया जैसा घिनौना टैक्स" लिया...!इतना ही नहीं.... हमारे हिंदुस्तान के अलावा भी हिन्दू सारी दुनिया में फैले हुए हैं..... और वे सभी ऊँचे तथा सम्मानित पदों पर कार्यरत हैं...... जिनकी गिनती ही नहीं की गयी है...!और, जहाँ तक सामरिक शक्ति की बात है तो...... हमारी और, मुस्लिम देशों की तुलना ही बेकार है ... क्योंकि , एक-दो तो छोडो...... 6 -7 मुस्लिम देश मिलकर भी..... हमारा मुकाबला नहीं कर सकते हैं.....!विज्ञान और टेक्नोलोजी में भी हम किसी भी मुस्लिम देश कोसों आगे हैं....कुल मिलकर कहने का तात्पर्य ये है कि..... दुनिया में 56 मुस्लिम देशों का अस्तिस्व उतना ही है कि........ जैसे कोई ये बोले कि.... दुनिया में हम हिन्दुओं के (सिर्फ भारत में ही ) 29 states और 7 union territory हैं...!इसीलिए.... मुल्लों की नौटंकियों और फालतू बातों में नहीं आयें ..... और, गर्व करें कि हम हिन्दू हैं.....एक बात हमेशा याद रखें..... हम हिन्दू सदियों से इन मुल्लों के बाप थे.... वर्तमान में भी हैं.... और, हमेशा ही रहेंगे.......!